गोपालगंज: कालाजार के प्रति जन जागरूकता के लिए दिवाल लेखन के माध्यम से चलेगा अभियान

गोपालगंज को कालाजार मुक्त बनाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है। कालाजार उन्मूलन की दिशा में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। कालाजार के प्रति आमजनों को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। कालाजार के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभाग ने एक अच्छी पहल की है। अब जिले में दीवार लेखन के माध्यम से कालाजार के प्रति आम जनों को जागरूक किया जाएगा। इस संबंध में वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ अंजनी कुमार ने जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी को पत्र जारी कर आवश्यक दिशा निर्देश दिया है। जारी पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य प्राप्ति के लिए जिले में जन जागरूकता अभियान में गति लाने पर विशेष ध्यान देने की अत्यंत आवश्यकता है| जन जागरूकता के चल रहे कार्यक्रमों के साथ दिवाल लेखन कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

सार्वजनिक स्थलों पर लिखा जाएगा कालाजार के लक्षण व बचाव की जानकारी: पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि जिले के अति आक्रांत प्रखंडों के ग्रामों के सार्वजनिक स्थलों सामुदायिक व सरकारी भवनों की दीवारों पर कालाजार से बचाव के लिए कालाजार के लक्षण के बारे में लेखन किया जाएगा। ताकि अधिक से अधिक समुदाय को इसके प्रति जागरूक किया जा सके। दीवार लेखन कार्यक्रम की फोटोग्राफी भी विभाग के द्वारा कराई जाएगी। दीवार लेखन के दौरान जागरूकता संदेश के साथ-साथ जिले के सिविल सर्जन, डीएम जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का मोबाइल नंबर भी अंकित किया जाएगा।

कालाजार के प्रमुख लक्षण एवं उपचार: दो हफ्तों से अधिक बुखार एवं चमड़े पर यदि दाग-धब्बा दिखता है, तो यह भी कालाजार हो सकता है। यदि ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत अपने गाँव की आशा दीदी से संपर्क करें या नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र सरकारी अस्पताल में जाएँ । कालाजार की जाँच एवं सर्वोतम इलाज सरकारी अस्पताल में निःशुल्क उपलब्ध है। सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद मरीजों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 6600/ रुपये एवं भारत सरकार द्वारा 500/रुपये श्रम क्षतिपूर्ति राशि भुगतान का प्रावधान है।

कालाजार से बचाव के उपाय:

  • घर के सभी कमरों यथा सोने का कमरा, गोशाला, पूजा घर, रसोई घर आदि के सभी दीवारों पर छिड़काव कराएँ।
  • छिड़काव के बाद कम से कम ढाई महीने तक दीवारों पर लिपाई-पुताई न करें।
  • जमीन से ऊंचे स्थान यथा खटिया, चौकी पर सोएं एवं मच्छरदानी का प्रयोग करें।

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