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मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से चीन की हो गई वारे-न्यारे

पिछले दिनों चाइनीज समान के बहिस्कार करने के लिए देश भर में एक अघोषित युद्ध सोशल मीडिया पर चल रहा था, कहा जा रहा था कि चाइनीज समान खरीदना मतलब अपने देश कि सेना कों कमजोर करना है. क्योंकि चाइना पाकिस्तान कों हर तरह से सपोट कर रहा है, जिससे हमारी सेना कों खतरा है. लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से नोटबंदी के फैसले के चलते चीन की ई-पेमेंट कंपनियों को फायदा मिल रहा है. 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के बाद देश में लोग कैशलेस विकल्पों की तलाश में जुटे हैं. आपको बता दें कि देश में सबसे ज्यादा चर्चित दो ई-वॉलेट पेटीएम और स्नैपडील के मालिकाना हक वाले फ्रीचार्ज में चीन की दिग्गज ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा का निवेश है.

इसी बीच खबर है कि एक रिपोर्ट साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी है जिसमे यह जिक्र है कि दो अन्य बड़े प्लेयर्स मोबिक्विक और ऑक्सिजन का भी कहना है कि चीनी निवेश के लिए उनकी बातचीत चल रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि एक दिग्गज ई-वॉलेट कंपनी ने बताया कि नोटबंदी के चलते ई-पेमेंट फर्म्स को निवेश हासिल करने के लिए बड़ा अवसर मिला है. खासतौर पर ई-वॉलेट कंपनियों को चीन से बड़ा निवेश मिलने की संभावना है.

आपको बता दे कि देश में ई-पेमेंट सेक्टर की लीडिंग कंपनी पेटीएम के मुताबिक नोटबंदी के बाद से उसकी ग्रोथ 1000 पर्सेंट बढ़ गई है. पेटीएम पर हर दिन 1.2 अरब डॉलर की 70 लाख ट्रांजैक्शंस हो रही हैं. अन्य कंपनियों का भी कहना है कि बीते कुछ सप्ताह में उनका टर्नओवर दुगना से तीनगुना तक बढ़ा है. चीन की कंपनी अलीबाबा ने पेटीएम की होल्डिंग कंपनी वन97 कॉम्युनिकेशंस में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी खरीदी है. अलीबाबा ने पेटीएम में 680 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर 40 पर्सेंट हिस्सा लिया है. अगर पेटीएम जैसी कंपनी कों फ़ायदा होगा जिसमे चाइना के कम्पनी का शेयर हो तों आखिर में चाइना कों फायदा होगा ही.

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