जज से रंगदारी मांगने वाला व्यक्ति लगा पुलिस के हत्थे

जज से रंगदारी मांगने व जान से मारने की धमकी देनेवाला व्यक्ति फौजी निकला, जो फिलवक्त जालंधर में पोस्टेड था. पुलिस ने शुक्रवार को रंजय सहनी नामक उक्त फौजी को आदापुर थाना स्थित उसके गाँव अररा से दबोच लिया है. अभी जालंधर से आये उसे आधे घंटे भी नहीं हुये थे कि पुलिस घर पर आ धमकी. इसके पास से आधे दर्जन मोबाइल के साथ आठ आधार कार्ड व कई सीम भी बरामद किया गया है. रंजय के पास से वह मोबाइल व सीम भी बरामद किया गया है, जिससे उसने जज को धमकाया था. यह खुलासा एसपी जितेन्द्र राणा ने आयोजित संवाददाता सम्मलेन के दरम्यान शुक्रवार की रात में किया.

दरअसल जज को मिली धमकी के बाद पुलिस काफी सक्रीय हो गयी और सीम का डिटेल्स निकालकर अररा के ही रंजीत पासवान को गिरफ्तार कर लिया. कॉलर ने जज से रंगदारी की रकम जिसे देने को कहा था वह नंबर रंजीत के पास ही था. लिहाजा पुलिस ने उसे घोड़ासहन के शेखौना से गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की. उसकी निशानदेही पर ही रंजय के बहनोई के चाचा नंदू पासवान को भी गिरफ्तार किया गया. इनलोगों से हुई पूछ-ताछ और मोबाइल लोकेशन के आधार पर असली मुजरिम यानि रंजय तक पहुची. पहले मोबाइल का लोकेशन जालन्धर और अंतिम लोकेशन लखनऊ का मिला था. पुलिस यह समझ चुकी थी कि रंजय अपनी बहन को लेकर भागनेवाले को फँसाने के लिए यह जाल रचा था.

अपने बहनोई के नाम से सीम निर्गत कराकर रंजय ने जज को इसलिए धमकाया ताकि उसका बदला पूरा हो सके. उसकी बहन को भागाकार उस परिवार ने जो सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल की थी उस घटना के प्रतिशोध में वह इस रंगदारी के मुक़दमे उस परिवार की बर्बादी की दास्ताँ लिखना चाहता था. इसके लिए उसने फूलप्रूफ प्लान तैयार किया. फ़रवरी में जब वह गाँव आया था तो उसने अपने बहनोई रन्नू के चाचा नंदू सहित कई नामों का ओरिजिनल आधार कार्ड जूटा लिया. संभवतः इसके लिए उसने किसी डाककर्मी या उसके करीबी किसी व्यक्ति को मिलाकर आधार कार्ड हासिल किया था. इसके बाद इन आधार कार्डों से उसने गोरखपुर से सीम निकलवाया. फिर जज का नंबर किसी ताईद से जुटाया. लेकिन गलती से नंबर जज एन.के.यादव जगह एन.के.प्रियदर्शी का मिल गया और रंजय ने फोन कर जज को धमका दिया कि मेरे भतीजा का मामला तुम्हारे यंहा फंसा है. उसके केस का निपटारा करो. ताकि पुलिस जाँच में नंदू फँस जाये और उसका पूरा परिवार तबाह हो जाये.

दरअसल रंजय की बहन को लेकर भागनेवाले रन्नू पासवान के खिलाफ अपहरण का मामला 213/15 दर्ज किया गया था. लेकिन बहन व बहनोई की गिरफ्तारी के बाद मामला उलट गया. कोर्ट में 164 के बयान में बहन ने स्वेच्छा से शादी करने कि बात स्वीकार ली तो रंजय के लिए अब अदावत पूरी करने के लिए दुसरा रास्ता अख्तियार करना पड़ा. उसने उसके चाचा नंदू के नाम के सिम से जज को धमकाया. रंजय ने अपनी बहन को भगाने में सहयोग करनेवाले रंजीत पासवान को भी फ़साने के लिए उसका नंबर जज को रंगदारी की रकम देने के लिए लिखा दिया.

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