गोपालगंज: आशा कार्यकर्ता की कर्तव्यनिष्ठा से संस्थागत प्रसव और परिवार नियोजन की राह हो रही आसान

गोपालगंज: आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग की मजबूत इकाई होती है। उनके कंधे पर स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव और घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी है। यह उनका कर्तव्य भी है। आशा कार्यकर्ता अपने कर्तव्यों को काफी ईमानदारी के साथ निवर्हन कर रही हैं। उन्हीं में से एक है हथुआ प्रखंड की आशा कार्यकर्ता इन्दु देवी। एक समय ऐसा था जब गांव में महिलाओं का प्रसव घर पर हीं ज्यादा होता था। संस्थाागत प्रसव के तुलना में गृह प्रसव ज्यादा होता था। आशा इंदु देवी गर्भवती महिलाओं को जन-जागरूक करने के लिए घर-घर जाती थी। लेकिन इनकी बातों को कोई नहीं मानता और लोग गर्भवती महिलाओं का प्रसव प्राइवेट हॉस्पिटल में करवाते थे। गर्भवती महिलाओं के सास-ससुर एवं पति को समझाने कई बार उनके घर जाती और समझाती थी कि अगर गर्भवती महिलाओं का प्रसव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर करवाएंगे तो बच्चे को बीसीजी, हेपेटाइटिस बी,डीटीपी का टीका लगाया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रशिक्षित एएनएम दीदी रहती हैं। डॉक्टर भी रहते हैं। मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेगा। धीरे धीरे आशा इंदु देवी के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ता गया। इनके क्षेत्र के लोग प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं का प्रसव स्वास्थ्य केंद्र पर करवाने लगे। आशा इंदु देवी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हथुआ,गोपालगंज के द्वारा वर्ष 2021- 22 में परिवार कल्याण में ऑपरेशन कार्यक्रम के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था।

आशा दाई गांवभर की माई को चरितार्थ कर रही हैं इन्दु: आशा दाई गांवभर की माई , यह आशा इन्दू पर बिल्कुल ही सार्थक प्रतीत होता है। आशा इंदु देवी का कार्य क्षेत्र पिछड़ा हुआ है। वह प्रसव के तीन महीना पूर्व गर्भवती महिलाओं के परिवार से मिलती और कहती हैं कि आप रोज तीन से चार सौ रुपया कमाते हैं। उनमें से कुछ रुपए को आप प्रतिदिन बचाइए। इससे प्रसव के समय आपको कर्ज लेना नहीं पड़ेगा। प्रसव पूर्व गर्भवती महिलाओं को तैयारी भी करवाती हैं। इस तैयारी के अंतर्गत साफ-सफाई के लिए कपड़ा, साबुन,तेल, की व्यवस्था करवाती एवं एंबुलेंस के नंबर गर्भवती महिलाओं के परिवार के सदस्यों को देती हैं।

शिशुओं की देखभाल की निभाती हैं जिम्मेदारी: शिशु के जन्म के बाद नवजात शिशुओं की देख-भाल के खास तरीके कंगारू मदर केयर की सलाह देती हैं। प्रसव के बाद मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाने की सलाह भी देती हैं।आशा इंदु देवी के परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि वह आशा के रूप में कार्य करें। लेकिन जब इनके पति का स्वर्गवास हो गया तो बच्चे की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और उसके बाद वह आशा के रूप में काम करने लगी।

पंचायत में सबसे ज्यादा बंध्याकरण करवाया: इंदु देवी अपने पंचायत के डोमा हाथा एवं हथुआ माली टोला में परिवार नियोजन की विशेषताओं को समझा कर कई लोगों का बंध्याकरण करवाया है। कई महिलाओं को छोटा परिवार की विशेषताओं को समझा कर कई लोगों को पीपीआईसीडी लगवाई है। इंदु देवी ने पंचायत की सभी आशाओं में सबसे ज्यादा महिलाओं का बंध्याकरण करवाया एवं पीपीआई सीडी किट लगवाई है। उनके क्षेत्र के अल्पसंख्यक परिवार जो बंध्याकरण नहीं करवाते , उनको गर्भ निरोधक गोलियां एन, छाया ,हमेशा देती रहती हैं। ताकि उनका छोटा एवं सुखी परिवार हो।

कोविड के दौरान तमाम विरोध का सामना कर की ड्यूटी: कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए आशा इंदु देवी कहती हैं कि अल्पसंख्यक परिवार में कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगवाने के लिए उनको समझाने गई थी। वे लोग कह रहे थे कोविड-19 से बचाव की वैक्सीन लेने से बच्चा नहीं होगा। हद तो तब हो गई जब एक महिला तो झाड़ू लेकर मारने के लिए आई थी। आशा इन्दू अपने आप को किसी तरह से बचाई थी। आशा कहती हैं कि क्षेत्र मे काम करना और लोगों को समझाना आसान काम नहीं है। काफी मेहनत करना होता है किसी बात को समझाने के लिए। सही बात को लोगों को समझाने में काफी समस्या आती है, लेकिन अफवाह पर लोग बहुत जल्द विश्वास कर लेते हैं। लेकिन हम भी हार मानने वाले नहीं हैं। लोगों को जागरूक करना मेरा कर्तव्य और जिम्मेदारी है।

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