राम मंदिर को यूपी चुनाव में मुद्दा ना बनाने पर बीजेपी से नाराज हो रहे हैं हिंदू नेता

जिस राम मंदिर के मुद्दे की वजह से बीजेपी ने यूपी सहित पूरे देश में पहली बार कमल खिलाया था. उसी राम मंदिर के आगामी यूपी चुनाव में मुद्दा ना बनाने से बीजेपी को कट्टर हिंदु वोट बैंक का नुकसान हो सकता है. जिसकी सुगबुगाहट अभी से ही देखने को मिलने लगी है. क्योकि बीजेपी के इस फैसले से नाराज निर्मोही अखाड़े के प्रमुख महंत पुजारी रामदास ने पीएम मोदी सहीत पूरी पार्टी पर निशाना साधा है.

राम मंदिर जन्मभूमि मामले में 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले में शामिल निर्मोही अखाड़े के प्रमुख महंत पुजारी रामदास ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इनकी कथनी और करनी में फर्क है. 1991 में राम मंदिर के मुद्दे को इतना जोर शोर से उठाया कि चार-चार प्रांतों में बीजेपी की सरकार बन गई. जब अटल बिहारी पीएम बने थे, तब भी ये मुद्दा उठा था. बीजेपी वाले जोर शोर से चिल्लाते थे कि ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’. और आज कहते हैं कि राम मंदिर उनका मुद्दा नहीं है. बीजेपी की सरकार बनाने के लिए राम मंदिर के अलावा कोई दूसरी वजह नहीं थी. लेकिन आज वो अपने ही वादे से मुकरते हुए दिख रहे हैं.

महंत रामदास ने कहा कि अगर राम को भुलाएंगे तो आगे चल कर बहुत दिक्कत में पड़ जाएंगे. जब आडवानी जी ने रथ यात्रा निकाली थी तो नरेंद्र मोदी ही उसके संयोजक थे. अगर मंदिर बनाना उनके एजेंडे में नहीं था तो फिर उस वक्त संयोजक क्यों बने थे. आगे उन्होने कहा कि लोकसभा चुनाव में हिंदुओं मे एकजूट होकर बीजेपी को इसीलिए वोट किया था क्योंकि वो राम मंदिर बनाएंगे. लेकिन अब साधु संतो का समाज इनके बहकावे में नहीं आयेगा.

न्यायालय पर है पूरा भरोसा महंत रामदास ने आगे कहा कि उनका पूरा भरोसा न्यायालय पर है. क्योकि अब तक जो भी हुई है न्यायालय़ के आदेश पर ही हुआ है. चाहे ताला खुलवाना हो या फिर 1989 में शिलान्यास. या फिर 2010 का फैसला. इसलिए न्यायालय पर उनका भरोसा है और आगे भी न्यायालय के आदेश का इंतजार करेंगे

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