गोपालगंज: कटाव से हर साल सैकड़ों परिवार हुई विस्थापित, बांध पर झोपड़ी बनाकर रहने को विवश

गोपालगंज में हर साल लोगों को बाढ़ और कटाव की त्रासदी झेलनी पड़ती है। कटाव से हर साल सैकड़ों परिवार विस्थापित हो जाते हैं। लेकिन इन बाढ़ और कटाव विस्थापितों को अभी तक न तो जमीन देकर बसाया गया और न ही उन्हें रहने का कोई स्थाई ठिकाना हो सका है।

सदर प्रखंड के विशुनपुर सारण बांध पर ऐसे ही बाढ़ पर स्थापित सैकड़ों की संख्या में मौजूद है। जो झोपड़ी बनाकर यहां वर्षो से रह रहे हैं। सरकार की भूमिहीन बासगीत योजना के तहत इन बाढ़ पीड़ितों को बसाने के लिए जमीन का पट्टा 3 साल पहले दिया गया था। विस्थापितों के पास जमीन के कागज भी हैं। लेकिन उन्हें आज तक वह जमीन नहीं दिखाया गया और न ही जमीन मिल सका। कटाव पीड़ितों के मुताबिक वे पिछले 13 साल से सारण बांध पर शरण लिए हुए हैं। उन्हें वर्ष 2018 में जिला प्रशासन के द्वारा बासगीत योजना के तहत 5 – 5 डिसमिल जमीन भी उपलब्ध कराया गया। 87 लोगों को जमीन का पट्टा भी दिया गया। लेकिन उन्हें जमीन के पट्टा का सिर्फ कागज ही उन्हें मिला है। और कागज वे अपने हाथों में लेकर दिखा भी रहे हैं। लेकिन उन्हें हकीकत में अभी तक जमीन का एक टुकड़ा भी मयस्सर नही हो सका है।

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