गोपालगंज में रैफ व पुलिस के जवानों ने कवरेज के दौरान पत्रकार को पीटकर किया गंभीर रूप से घायल

गोपालगंज जिले के जलालपुर स्थित एसएमडी कॉलेज में एडमिट कार्ड नहीं मिलने व कॉलेज प्रशासन के नीतियों के खिलाफ छात्रो के विरोध मार्च व उपद्रव के दौरान पुलिस की नाकामी को सामने ला रहे छात्रो सहित पत्रकारों पर पुलिसवालों व रैफ के जवानों ने अपना गुस्सा निकाला। एन एच 28 के भठवा मोड़ के पास हो रहे छात्रो के सड़क जाम व आगजनी की रिपोर्टिंग करने पहुंचे मीडियाकर्मियों पर पुलिस ने जमकर लाठियों से हमला किया। इतना ही नहीं गंदे, पुलिसकर्मियों ने अभद्र अपशब्दों का प्रयोग करते हुए पत्रकारों पर भी लाठियों से हमला किया। मीडियाकर्मी हाथों में कैमरा और माइक लेकर कराहते रहे, लेकिन पुलिसकर्मियों का उन पर डंडा चलना नहीं रुका। पुलिस के इस हमले में तीन की संख्या में पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट बुरी तरह से जख्मी हो गए,  जिनमें से जन टीवी के पत्रकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव बुरी तरीके से जख्मी हो गये और उनका हाथ टूट गया. तुरंत उन्हें सदर अस्पताल ,गोपालगंज में भर्ती कराया गया। जहाँ उनका इलाज चल रहा है .

लगातार पुलिस जिले के लॉ एंड आर्डर को बरकरार रखने में नाकामयाब साबित हो रही है और अपराध का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है . एक तरफ अपराध को नियंत्रित करने में विफल पुलिस अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए आम लोगो पर लाठियां व झूठे केस में फंसा दे रही है तो दुसरी तरफ अपने हक़ व भविष्य के लिए कर रहे छात्रो के विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए समझाने बुझाने के बजाय उनके ऊपर लाठियां बरसा रही है . इन सभी कमियों को कैमरे के सामने उजागर होने से बचने के लिए पत्रकार को भी नहीं बख्शा जा रहा है. जिस तरीके से पुलिस पत्रकार को असुरक्षित महसूस करा रही है इससे आकलन लगाया जा सकता है की एक आम आदमी की स्थिति कैसी होगी . पत्रकार समूह इस हमले की घोर निंदा कर रहा है और जल्द ही वह इसे आन्दोलन व धरना का रूप दे देगा यदि प्रशासन द्वारा उनलोगों पर किसी तरीके के कारवाई की पुष्टि नहीं की जा रही है .

जन टीवी  संवाददाता शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया की छात्रो के आक्रोश प्रदर्शन को वो अपने कैमरे में कैद कर रहे थे की तभी तीन की संख्या में आकर रैफ के जवानों ने हमला कर दिया और लाठी बरसाने लगे .जबकि वो अपने गले में प्रेस की आईडी भी लटका रखे थे और बता भी रहे थे की वो पत्रकार है फिर भी जवान नहीं माने और उन्होंने उनके कैमरे को तोड़ दिया और जमकर पिटाई कर दी . जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गये .

दिलचस्प बात यह है की जिन पुलिसवालो ने पत्रकार पर हमला किया है उन्हें बचाने के लिए पुलिस ने यह कहना शुरू कर दिया है की उनके द्वारा कोई हमला नही किया गया है . जिला पुलिस ने निर्लजता की सारी हदें पार कर दी है और बजाय इसकी जांच करने के वह इसे लीपापोती करने के चक्कर में लग गयी है . पत्रकार समूह चुप नहीं बैठने वाला जब तक दोषियों के ऊपर ठोस कारवाई प्रशासन द्वारा नहीं किया जाता है .

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