AAP ने गिनाए जेटली के आरोप, मांगा इस्‍तीफा !

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि सीबीआई ने डीडीसीए में कथित अनियमितताओं की जांच से जुड़ी फाइलें हासिल करने के इरादे से उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी के ऑफिस में 15 दिसंबर को छापेमारी की थी। केजरीवाल व आप नेताओं का कहना है कि इन अनियमितताओं में केंद्रीय वित्‍त मंत्री अरुण जेटली फंस रहे हैं। पार्टी के नेताओं ने गुरुवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर जेटली के डीडीसीए अध्‍यक्ष रहते संगठन में हुई कथित अनियमितताओं की लिस्‍ट गिनाई और उनका इस्‍तीफा मांगा। जेटली 1999 से 2013 तक दिल्‍ली के क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष थे। 12 नवंबर को दिल्‍ली सरकार ने डीडीसीए पर लगे आरोपों की जांच के लिए पैनल बनाने का एलान किया था। इस पैनल में प्रिंसिपल सेक्रेटरी (पीडब्‍ल्‍यूडी) चेतन बी. सांघी, सेक्रेटरी (स्‍पोर्ट्स) पुनया सलिल श्रीवास्‍तव और वरिष्‍ठ वकील राहुल मेहरा को शामिल किया गया है। दो दिन की जांच में इस पैनल में तीन जांच समितियों की रिपोर्ट पर गौर किया। इनमें से एक रिपोर्ट कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत काम करने वाले सीरियस फ्रॉड इन्‍वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा गठित पैनल की है। दूसरी रिपोर्ट उस पैनल की है जो डीडीसीए ने आंतरिक जांच के लिए बनाया था। एक और रिपोर्ट उस पैनल की है जो दिल्‍ली हाई कोर्ट के आदेश पर बनाया गया था। यह पैनल डीडीसीए की स्‍पोर्ट्स वर्किंग कमेटी के चुनावों की निगरानी के लिए बनाया गया था।

एसएफआईओ की रिपोर्ट में 20 से ज्‍यादा अनियमितताओं का जिक्र किया गया है। 2008-09 से 2011-12 के बीच वित्‍तीय अनियमितताओं का भी जिक्र है। इस दौरान अरुण जेटली डीडीसीए के अध्‍यक्ष थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि डीडीसीए की निगरानी व्‍यवस्‍था बेहद कमजोर है। इसकी चल संपत्तियों का लेखाजोखा भी ठीक तरह से तैयार नहीं किया गया है। 20 हजार रुपए से ज्‍यादा के अहम लेनदेन नकद किए गए। डायरेक्‍टर और सदस्‍यों को निदेशक मंडल या केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना ही भुगतान कर दिए गए। फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम को नए सिरे से बनाने में पांच साल (2002-2007) लग गए। इसका शुरुआती बजट 24 करोड़ रुपए था, जो बढ़ कर 114 करोड़ हो गया। स्‍टेडियम बनाने से जुड़ा कॉन्‍ट्रैक्‍ट देने से संबधित रिकॉर्ड भी ठीक से नहीं रखा गया, एमसीडी और डेल्‍ही अरबन आर्ट्स कमीशन की मंजूरी के बिना गैरकानूनी निर्माण किए गए। डीडीसीए ने उचित मंजूरी लिए बिना कॉरपोरेट बॉक्‍सेज बनवा लिए। एसएफआईओ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अरुण जेटली अरुण जेटली निदेशक मंडल की बैठकों में नॉन-इग्‍जेक्‍युटिव चेयरमैन की तरह शामिल होते थे और उन्‍होंने रोज मर्रा के कामकाज से खुद को अलग कर रखा था।

डीडीसीए की आंतरिक जांच रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं– बड़े पैमाने पर वित्‍तीय गड़बिड़‍यों के सबूत हैं, 2013-14 में कुछ फर्म्‍स को गैरकानूनी तरीके से बेहिसाब भुगतान किए गए, डीडीसीए में जरूरत से ज्‍यादा स्‍टाफ होने के बावजूद भर्तियां की गईं और इस पर काफी रकम खर्च की गई, ओवरटाइम के मद में काफी बड़ी रकम का भुगतान हुआ, नौ ऐसी कंपनियों को भुगतान किया गया जिनके रजिस्‍टर्ड ऑफिस, ईमेल आईडी और यहां तक कि डायरेक्‍टर्स के नाम भी एक ही पाए गए। डुप्लिकेट बिल जारी किए गए और भुगतान का उचित कारण बताए बिना पैसे दिए गए, ऐसी कंपनियों को भी भुगतान कर दिया गया जिसने कभी कोई काम ही नहीं किया।

हाईकोर्ट द्वारा गठित पैनल ने यह कहा– डीडीसीए के कामकाज में पारदर्शिता का घोर अभाव है, इसके सदस्‍य गैरकानूनी तरीके से डीडीसीए के बैनर तले निजी क्रिकेट अकादमी चला रहे हैं और पैसा पीट रहे हैं, डीडीसीए के मैचों में छात्रों और वास्‍तविक दावेदार खिलाड़‍ियों के लिए कोई संभावना नहीं है।

गुरुवार को आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्‍वास, आशुतोष, संजय सिंह ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में यही आरोप गिनाए और मांग की कि अरुण जेटली को इस्‍तीफा देना चाहिए।

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