नोटबंदी की मार: महज चंद पैसो के लिए बेरोजगार हुए मजदूरों ने लिया नसबंदी का सहारा

नोटबंदी के बाद से लोगों को हो रही परेशानियों के कई मामले सामने आ रहे हैं। इसी बीच नोटबंदी के दुष्प्रभाव के रूप में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नोटबंदी का सबसे बड़ा असर अब दिहाड़ी मजदूरों पर देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नोटबंदी की वजह से कई मजदूरों ने नसबंदी कराकर पैसे कमाने का अनोखा तरीका अपना लिया है।

यहां अब तक 38 मजदूर नसबंदी करा चुके हैं। इन मजदूरों को कहना है कि हर शख्स को नसबंदी कराने पर 1000 रुपए का चेक मिल रहा है और काम नहीं होने की वजह से उनके पास आराम करने का पूरा समय है। ऐसे में भला पैसों की किल्लत के बीच नसबंदी ही क्यों ना कराएं?

इन मजदूरों ने पीएसआई (पॉपुलेशन सर्विस इंटरनेशनल) संस्‍था के पास आकर नसबंदी कराई है। इनमें से कुछ मजदूरों ने पूछने पर साफ बताया कि उनकी नसबंदी कराने की वजह पीएम मोदी की नोटबंदी है।

पीएसआई के टीम लीडर संदीप पांडेट ने बताया कि 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद से नसबंदी कराने के लिए आने वाले मजदूरों की संख्‍या में इजाफा हुआ है।

अलीगढ़ में मजदूर ने मजबूर होकर कराई नसबंदी

वहीं अलीगढ़ के नहरौला गांव के निवासी पूरन शर्मा को रूपयों की जरूरत थी जब उन्हें कहीं और से रूपयों का प्रबंध होता नजर नहीं आया तो उन्होंने नसबंदी को अपना लिया।

दरअसल जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार नसबंदी को बढ़ावा देती है। इसी नीति के तहत उत्तर प्रदेश में नसबंदी कराने वाले पुरूष को 2000 रुपए और महिला को 1400 रुपए दिए जाते हैं। पूरन शर्मा मिस्त्री हैं, उनके 2 बेटे और 1 बेटी है। मजदूरी पर मकान बनाने का काम करने वाले (मिस्त्री) पूरन शर्मा की पत्नी मूक बधिर है। पूरन नोटबंदी के बाद कई दिन से काम ना मिल पाने पर अपनी मूक-बधिर पत्नी के साथ नसबंदी कराने पहुंचा लेकिन पत्नी के सुनने और ना बोल पाने की वजह से स्वास्थ्य विभाग जोखिम नहीं लिया। जिसके बाद उसने अपनी नसबंदी करा ली।

पूरन शर्मा ने कहा कि नोटबंदी को लेकर उनके पास पैसों की कमी थी, उनके पास न तो जमीन थी और न कोई तरीका ही था। उन्हें यह पता चला कि नसबंदी करने के बाद 2 हजार रूपए मिल सकते हैं जिसके कारण उन्होंने नसबंदी करने का निर्णय लिया।

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