गोपालगंज कुचायकोट के दम्पति नहीं भूल पा रहे इंदौर-पटना ट्रेन हादसा का खौफनाक मंजर

इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के हादसा का वो खौफनाक मंजर आज भी आंखों के सामने उसी तरह मंडराता नजर आ रहा है. हादसा के लगभग 60 घंटे बाद भी ये दम्पति उस पुखराया के खौफनाक मंजर को नहीं भूल पा रहे है.

हादसा के आज करीब 75 घंटे बाद अपने पैतृक गांव कुचायकोट पहुंचे इस दम्पति को रविवार की भोर में हुई ये ट्रेन हादसा अभी भी एक पल के लिए आंखों से ओझल नहीं हो पा रही है. बता दें कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस की रविवार की भोर में कानपुर और चिरगांव के बीच पुखराया स्टेशन पर हुए हादसे में ट्रेन की बोगी संख्या एस- 9  में यात्रा कर रहे गोपालगंज जिले के कुचायकोटथाना  के बलथरी गांव निवासी नरेन्द्र शाही तथा उनकी पत्नी सुमन शाही अभी भी उसे भूल नहीं पा रही है.

ज्ञात हो कि यह दम्पति इंदौर-पटना एक्सप्रेस से लखनऊ आ रहे थे. दम्पति को उत्तर-प्रदेश के कुशीनगर जनपद के तरया सुजान में एक रिश्तेदार के घर एक शादी समारोह में शामिल होना था. उनके टिकट प्रतीक्षित थे. इसलिए दम्पति को बोगी संख्या एस- 9 में यात्रा करना पड़ रहा था. हालांकि घटना के 2 घंटे पूर्व टीटीई ने इस दम्पति का टिकट कन्फर्म करते हुए एस- 3 बोगी में जाने के लिए कहा. लेकिन सच ही कहा गया है कि ‘जाको राखे साईया, मार सके ना कोय’ वाली कहावत चरिचार्थ हुई और दम्पति ने टीटीई से अगले बोगी में जाने से इंकार करते हुए कहा कि हमलोग यही एडजस्ट हो गए है इस ट्रेन हादसा में एस- 3 बोगी के परखच्चे उड़ गए और घायलों व मृतकों की बहुतायत संख्या इसी बोगी से थी. आज यह देख दम्पति ईश्वर को लाख दुआएं देते है, कि ईश्वर का लाख-लाख शुक्र है कि हम बोगी बदलकर एस-9  से एस-3 नहीं गए. मंगलवार की सुबह यह दम्पति अपने घर सुरक्षित पहुंच गई, जहां परिवार वालों में इनके पहुंचने की ख़ुशी थी वही गांव वाले भी इनके सही सलामत घर पहुंचने से कम खुश नहीं थे. हालांकि सही सलामत घर पहुंचे दम्पति सरकार और भारतीय रेल के रेस्क्यू की भी बहुत प्रशंसा की और बताया कि घटना के एक घंटे में लगभग सारी व्यवस्था घटनास्थल पर पहुंच चुकी थी. वही रेलवे द्वारा हादसे के बाद फंसे लोगों को अपनी सुविधा से उनके ठिकानों तक पहुंचवाया गया.

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