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हैप्पी बर्थडे शाहरुखः जानिए बॉलीवुड के इस बादशाह की 7 खूबियां

थोड़े से सामान और खुले आसमान जितने सपने लेकर 1990 के दशक में दिल्ली से एक युवक मुंबई पहुंचा. एक आम युवा से लेकर बॉलीवुड का बादशाह बनने तक का शाहरुख खान का सफर आसान नहीं था. मायानगरी में बिना किसी मजबूत सरपरस्ती वाले शाहरुख ने बावजूद इसके तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए अपना विशेष स्थान बनाया और आज वो देश-दुनिया के करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज कर रहे हैं. बुधवार को शाहरुख खान 51 साल के हो गए.

हालांकि शाहरुख की उपलब्धियों की सूची छोटी नहीं है और रोमांस के किंग कहे जाने वाले शाहरुख को बादशाह, किंग खान, राज, राहुल समेत तमाम नामों से पुकारा जाता है. हम सभी शाहरुख खान की फिल्मों, टेलीविजन धारावाहिकों, सम्मान, पुरस्कार समेत तमाम बातें जानते हैं. लेकिन फिर भी कुछ ऐसी बातें हैं जो शाहरुख को एक आम अभिनेता से अलग करते हुए एक शानदार इंसान भी साबित करती हैं.

मानद उपाधियां

पिछले साल एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के चांसलर ने शाहरुख को उनकी वैश्विक पहचान, अद्भुत रिकॉर्ड और मानवता के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया. इस दौरान दिया गया शाहरुख का भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. इसके अलावा शाहरुख को 2014 में फ्रांस का सबसे बड़ा नागरिक सम्मान लीजियन डीऑनर दिया गया था.

जबकि मलयेशिया सरकार ने भी सिनेमा में किए गए उनके कार्य के चलते ब्रांड लॉरिएट लीजेंडरी अवॉर्ड दिया. यह सम्मान पाने वाले वो इकलौते भारतीय हैं. इतना ही नहीं 2009 में ब्रिटेन की बेडफोर्डशायर यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें कला और संस्कृति के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी थी.

क्लीन इंडिया, ग्रीन इंडिया

वर्ष 2011 में शाहरुख खान ने दुनिया भर के लोगों को शौचालय उपलब्ध कराने के संयुक्त राष्ट्र के अभियान से हाथ मिलाया. सफाई और स्वच्छता के अभियान के वैश्विक ब्रांड एंबेसडर के रूप में शाहरुख ने ग्रामीण भारत में भी शौचालय बनवाने की दिशा में काम किया.

रोशन भविष्य

स्वदेश फिल्म में निभाए गए अपने किरदार से मिलता-जुलता काम शाहरुख ने उड़ीसा के कई गांवों को रोशन करके किया. द एनर्जी एंड रिचर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) द्वारा  लागू की गई इस योजना की लागत का खर्च स्वयं शाहरुख खान ने उठाया. शाहरुख ने 2009 में पांच और फिर 2012 में 12 और गांवों को गोद भी लिया.

कैंसर रोगियों की परवाह

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की वजह से अपनी मां को खो चुके शाहरु खान ने एक विशेष कैंसर डिपार्टमेंट और चिल्ड्रेंस वार्ड बनवाया. यहां पर आने वाले कैंसर से पीड़ित छोटे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च खुद शाहरुख खान उठाते हैं. 2009 में विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए एक कार्यशाला बनवाने के उद्देश्य से शाहरुख ने दुबई में आयोजित एक 10 मिनट के कार्यक्रम के दौरान 30 हजार दिरहम भी जुटाए थे.

बड़े दिलवाला रईस

जब सुनामी की चपेट में आने से दक्षिणी तटों के सैकड़ों गांव तबाह हो गए तब शाहरुख खान से आगे आते हुए प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 2.50 करोड़ रुपये दान दिए. इसके अलावा उन्होंने इससे प्रभावित कई गांवों के पुर्नविकास के लिए भी शाहरुख ने सहायता दी. उत्तराखंड में आई बाढ़ के दौरान भी शाहरुख ने खुद से कदम उठाते हुए प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के जीवन को संवारने के लिए 33 करोड़ रुपये दान दिए.

हमेशा सबसे पहले

भले ही आप मानें या नहीं. लेकिन शाहरुख खान पहले ऐसे हिंदुस्तानी हैं जिन्हें प्रतिष्ठित येल यूनिवर्सिटी में भाषण देने के लिए आमंत्रित किया गया. इतना ही नहीं शाहरुख को यहां की चब फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया. उनकी इस प्रसिद्धि के चलते हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें एक लेक्चर देने के लिए बुलाया. शाहरुख की प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वो दुनिया के पहले ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें गूगल और ट्विटर के मुख्यालय में भी आमंत्रित किया गया.

किस्मत भी उनके पीछे

यूं तो तमाम लोग कहते हैं कि शाहरुख जन्म से ही भाग्यशाली हैं और उनकी किस्मत सोने की कलम से लिखी गई है. लेकिन हकीकत कुछ ऐसी है कि उनकी प्रसिद्धि उन्हें आगे ले जाती है. जैसे पेरिस स्थित ग्रेविन म्यूजियम की ही बात लें जहां महात्मा गांधी के बाद वे ऐसे दूसरे भारतीय हैं जिनकी प्रतिमा लगाई गई है. उनकी वैश्विक प्रसिद्धि के चलते ही सिंगापुर में ऑर्किड की एक दुर्लभ प्रजाति का नामकरण उनके नाम पर किया गया. उन्होंने इसका नाम एस्कोसेंडा शाहरुख खान रखा.

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