असत्य पर सत्य की जीत का पर्व ‘दशहरा’

दशहरा यानि विजयदशमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने इस दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। इसे सबसे शुभ तिथि के रूप में जाना जाता है। लोग इस दिन नया काम शुरू करते हैं। सबसे बड़ी बात इस दिन शस्त्र पूजा भी की जाती है। इस दिन जगह-जगह मेले लगते हैं और रामलीला का आयोजन होता है। इस दिन  रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है।

पूरे भारत में रावण दहन आज भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इसके साथ ही आतिशबाजियां छोड़ी जाती हैं। इसके साथ ही साथ माँ दुर्गा की मूर्ति की स्थापना कर पूजा करने वाले भक्त मूर्ति-विसर्जन का कार्यक्रम भी गाजे-बाजे के साथ करते हैं।  दशहरा का पर्व हमें बुरे कार्यो पाप- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा प्रदान करता है।

माना जाता है कि इस दिन शमी के पौधे की पूजा करने से धन के देवता कुबेर आप पर प्रसन्न होते हैं और धन और यश प्रदान करते हैं। वहीं ये भी मान्यता है कि दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन बहुत ही शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन इस पक्षी के दर्शन मात्र से पूरा साल खुशहाल होता है।

वहीं कुछ लोग रावण दहन के बाद बच गयी लकड़ियों को घर में लाकर रख देते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस लकड़ी को घर में रखने देने मात्र से घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं।

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