Thu. Aug 22nd, 2019

सरेआम झोला लिए व्यक्ति ने दारोगा का पकड़ लिया कॉलर

सूबे में शराबबंदी अभियान ख़ाकी वालो पर इधर कुआँ उधर ख़ायी की कहावत अक्षरशः सही साबित हो रही है। शराब की सुचना पर धर पकड़ न करने पर विभागीय कार्रवाही का चाबुक चलने का खौफ तो दूसरी तरफ सुचना पर त्वरित कार्रवाही और तलाशी पर आम आदमी के गुस्से का शिकार हो अपनी बेइज्जती होने का डर।

रोज़ ब रोज़ खाकी वालो के लिये दुरूह बनता जा रहा है शराबबंदी का अभियान। मंगलवार को पटना से सटे मनेर में एक ऐसा मामला सामने आया जिसे पुलिस अधिकारी छिपाने में लगे रहें। मिली जानकारी के अनुसार की मनेर बाजार में शराब बिक्री की सूचना पर पुलिस टीम पहुंची थी। पुलिस दल ने एक व्यक्ति के झोले में शराब होने की बात पर उसकी तलाशी लेनी चाही। चश्मदीदों के अनुसार इसी बात पर कहासुनी हुई। जिस पर पुलिस टीम में शामिल दारोगा ने उसे पकड़ना चाहा।जैसे ही उसने कॉलर पकड़ा आरोपी ने भी दारोगा का सरेआम बीच बाजार कॉलर पकड़ लिये।व्यक्ति के इस दुस्साहस से सन्न पुलिस दल ने इसके बाद किसी प्रकार उस व्यक्ति से दारोगा का कॉलर छुड़वाया और उस व्यक्ति पर काबू पाया। इस दौरान कुछ लोगों ने दोनों की फोटो खीच ली।

किसी तरह पुलिस टीम उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गयी। जब इस घटना की सूचना पर उक्त दारोगा रमेश मिश्रा से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि उस झोले में कुछ नहीं था। इसलिए उसे छोड़ दिया गया। अब सवाल उठता है कि फिर पुलिस ने उसके साथ ऐसा सलूक क्यों किया। अगर वो पुलिस के साथ हाथापाई और बदतमीजी पर उतारू हुआ तो इस मामले में कारवाई क्यों नहीं हुई?

वही इस बीच बाज़ार सरेआम घटित घटना के बाबत जब मनेर थानाध्यक्ष एकरामुल हक़ से पूछा गया तो उन्होंने ने मामले की जानकारी  नहीं होने की बात कह मामले को टाल दिया।

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