बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों और भूमाफियाओं ने मिलकर बेच दिया पूरा गांव

बिहार में भूमाफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों का खेल किस तरह बढ़ चला है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक पूरा का पूरा गांव बेच दिया गया और किसी को पता भी नहीं चला. गांव के लोग तब हैरान रह गए जब आचानक से दबंगो ने गांव में दबिश दी और लोगों से घर खाली करने की बात कही. पूछने पर जो जवाब मिला वो हैरान करने वाला था. भूमाफिया का दावा है कि उसने पूरा गांव खरीद लिया है. यही नहीं उसने पूरे गांव के कागजात तो दिखाए ही साथ ही पिछले चार साल से लगान भरने की रसीद भी दिखाई. मतलब साफ है कि गांव आड नहीं चार साल पहले ही बिक चुका था. लेकिन किसी को कानों कान खबर नहीं हुई.

प. चम्पारण के बगहा थाना क्षेत्र में भूमाफिया ने धोखराहा गांव को ही बेच दिया है. इस इलाके में सबसे ज्यादा सरकारी भूमि है, जिसे सरकारी बाबुओं की मिलीभगत से लोग कब्जा कर रह रहे हैं. धोखराहा गांव के लोगों को इस बात की जानकारी तब मिली, जब भूमाफिया घर खाली करवाने पहुंचे. उन्हें बताया गया ये जमीन अब हमारी है. धोखराहा गांव में वर्षों सैकड़ों भूमिहीन परिवार रहता है. जिनके पास जमीन के नाम पर चंद टुकड़े हैं, जिस पर उनका मकान बना हुआ है. जानकारी के बाद गांव के लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस-प्रशासन से की है.

इस गांव को खरीदने वाले का नाम रामबाबू है जो खुद एक भूमाफिया है. कागजों के अनुसार 2012 में इस गांव को शाही से लीगल तरीके से रामबाबू ने खरीदा. बीते चार साल में सरकारी अधिकारी सीओ और कर्मचारी को मिलाकर दाखिल-खारीज करवा लिया और लगान का रसीद कटवाता रहा. सबसे बड़ी बात यह है कि बिना मौके पर पहुंचे, मुआयना किए भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारी-कर्मचारियों ने रामबाबू के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कर दी थी. चार साल रसीद कटाने के बाद रामबाबू जमीन पर कब्जे के लिये अचानक पहुंचा, तब पता चला की गांव बिक चुका है.

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