रामवृक्ष यादव : मथुरा हिंसा का मास्टरमाइंड

मथुरा के जवाहर बाग में गुरुवार की शाम अतिक्रमण हटाने गई यूपी पुलिस के जवानों पर आतिक्रमणकारियों द्वारा हमला किया गया था. जिसमें सिटी एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव शहीद हो गए, जबकि कई पुलिस वाले घायल हो गए. पुलिस के अलावा 12 और लोगों की मौत होने और 200 से ज्यादा लोगों की घायल होने की पुष्टि की गई है.

बताया जा रहा है कि जवाहरवाग में अवैध कब्ज़ा करने वाले लोगों को हटाने के दौरान पुलिस वालों की फायरिंग के बाद इन कब्जाधारियों द्वारा गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव नामक एक शख्स के इशारे पर पुलिस वालों के ऊपर बन्दुक से काउंटर फायरिंग की गई. साथ इन लोगों पर हाथगोला भी फैका गया.

बता दें की रामवृक्ष मध्यप्रदेश के सागर से दिल्ली और वहां से करीब 200 लोगों के साथ 15 मार्च 2014 को मथुरा आया था. जहाँ इसे मात्र दो दिन रहने की शासन से परमिशन मिली थी. मगर दो दिन के बजाय रामवृक्ष अपने सभी लोगो के साथ जवाहर बाग में करीब दो साल से रह रहा है. यहां की 270 एकड़ की जमीन पर इन लोगों का अवैध कब्ज़ा है. साथ ही इनकी मनमानी के कारण सरकार को लाखो का नुकसान हो रहा है.

रामवृक्ष ने अपने ताकत का डर दिखा कर 18-19 अप्रैल 2014 की रात राजकीय जवाहरबाग के स्टोर पर अपना हक जमा लिया. इतना हीं नहीं इन्होने वाग के नालियों को तोड़कर पक्की शोचालयों का निर्माण कर दिया है. साथ ही रामवृक्ष के आदमियों ने जवाहरबाग के नलकूपों पर भी अपना राज कायम कर लिया. इस सरकार की करीब 21 लाख का चुना लगा. हालांकि इन्हें सरकार द्वारा जवाहरबाग से हटने का नोटिस कई बार दिया गया लेकिन ये लोग यहाँ से टस से मस नहीं हुए. जिसके बाद पुलिस को यह कदम उठाना पड़ा.

रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव के शिष्य भी रह चूका है. साथ ही इसने इनकी विरासत को हासिल करने की पूरजोर कोशिश की थी मगर अंत में पंकज यादव को बाबा का उद्ताधिकारी बनाया गया है. इसके अलावा भी रामवृक्ष पर बलबा, फिरौती, सरकारी जमीन को क्षति पहुँचाने, मारपीट से जुरे कई मुकदमे भी चल रहे हैं. अभी भी रामवृक्ष अपना अलग गुट बनाकर रहता है जिसमें करीब 5000 लोग शामिल हैं. जो रामवृक्ष के एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार हैं.

 

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