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डॉ. राजेंद्र प्रसाद का गांव जीरादेई बना बिहार का पहला पूर्ण साक्षर मतदाता गांव

बिहार के सिवान का एक गांव पहला पूर्ण साक्षर मतदाता गांव बना हैं. यह गांव भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का हैं. पूर्ण साक्षर होने के बाद अब इस गांव में पंचायत चुनाव में कोई भी व्यक्ति मतदान में अंगूठे का निशान नही लगाएगा. सभी हस्ताक्षर करेंगे.

जानकारी के मुताबिक सिवान के डीईओ विश्वनाथ प्रसाद विश्वकर्मा को एक पूर्ण साक्षर मतदाता गांव बनाने की योजना आई. इस योजना के लिए उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ राजकुमार, स्थापना के डीपीओ अब्दुल अहद खां व अखिलेश्वर प्रसाद को शामिल कर कमेटी बनाई.

कमेटी बनाने के बाद एक गांव का चयन करना था. कमेटी ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गांव जीरादेई को चुना और इस गांव पूर्ण साक्षर बनाने की ठान ली. इसके लिए कमेटी ने चरणबद्ध तरीके से काम किया.

सबसे पहले गांव में निरक्षरों का एक सर्वें किया गया. शिक्षा विभाग ने मतदाता सूचि के आधार पर यह सर्वें किया. जीरादेई गांव में दो बूथ हैं. दोनों बूथ पर 293 मतदाता निरक्षर पाए गए. इनमें से 49 पुरुष व 244 महिलएं शामिल है.

इसके बाद उन्हें साक्षर बनाने का काम शुरू हुआ. इस काम में साक्षरताकर्मी कमलेश्वर ओझा के अलावा प्रेरक, तालिमी मरकज, टोला सेवक, महेंद्र हाईस्कूल के शिक्षक व 10वीं क्लास में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को लगाया गया. उनकी कोशिश रंग लायी और अब यहां के सभी मतदाता साक्षर हो गए हैं.

डीईओ विश्वनाथ प्रसाद विश्वकर्मा ने दावा किया कि यह गांव पूरे बिहार में ही नही पूरे देश में पहला पूर्ण रूप से साक्षर मतदाताओं वाला गांव बन गया है.

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