गोपालगंज में आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान के मौत के तीन दिन बाद भी परिवार का सुध लेने वाला कोई नही

गोपालगंज में आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान मनोज तिवारी की मौत के तीसरे दिन भी उनके परिवार का सुध लेने वाला और हालचाल लेने के लिए कोई नहीं पंहुचा. जबकि मृतक के पड़ोसियो के मुताबिक मृतक किसान मनोज तिवारी को मरने के बाद भी कफ़न तक नसीब नहीं हुआ. घर में पत्नी के पुराने कपडे थे. इसी कपडे में लपेट कर उनका शव ले जाया गया और खेतो में बिखरी लकड़ी को बटोरकर उनका डाह संस्कार किया गया. आर्थिक तंगी की वजह से डिप्रेशन में रह रहे 50 वर्षीय किसान मनोज तिवारी ने घर में रखी सल्फास की दवा खा ली थी. जिसकी वजह से इलाज के दौरान उनकी तड़पतड़प कर मौत हो गयी थी. मामला थावे प्रखंड के वृन्दावन गाँव का था.

बताया जाता है कि 50 वर्षीय किसान मनोज तिवारी को 08 बच्चे थे. इसके अलावा घर में पत्नी और बूढी माँ थी. किसान मनोज तिवारी के पास थोडा सा जमीन का टुकड़ा था और इसके अलावा उन्होंने बटईया पर जमीन लेकर खेती की थी. खेती में सूखा की वजह से गेहू की फसल बर्बाद हो गयी. वे कर्ज में डूबे हुए थे. कर्ज वापस करने के लिए उनके ऊपर लगातार दबाव बन रहा था. जिसकी वजह से वे डिप्रेशन में थे. परिवार बड़ा होने की वजह से उन्होंने ईण्ट भट्ठे पर मजदूरी शुरू कर दिया. वहा भी बारिश के मौसम में काम ठप्प हो गया था. जिसकी वजह से घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था. इसी डिप्रेशन में उन्होंने सल्फास खाकर जान दे दी.

मृतक के पडोसी ब्रिजेश तिवारी के मुताबिक मौत के बाद भी कफ़न के लिए घर में पैसे नहीं थे. पत्नी के पुराने कपडे में लपेटकर उनका दाह संस्कार किया गया था. घर में अक्सर खाने की कमी रहती थी. पड़ोसिओ की मदद से परिवार मुश्किल से चल पा रहा था. अब मनोज तिवारी की मौत के बाद पूरा परिवार अनाथ हो गया है.

वही इस मामले में पंचायत की मुखिया सरिता देवी का कहना है की उनके पंचायत के किसान मनोज तिवारी का देहांत हो गया. परिवार का आमदनी नहीं चल पा रहा था. जिसकी वजह से परेशान किसान ने सुसाइड कर लिया. महिला मुखिया ने सरकार से अपील करते हुए परिवार के एक सदस्य को नौकरी देकर बच्चो के पालन पोषण की गुहार लगायी है. मुखिया ने कहा की परिवार के सदस्य को वृधा पेंशन, आवास योजना का लाभ देना चाहिए.

वही इस मामले में जब डीएम और थावे प्रखंड के बीडीओ  से बात करने की कोशिश की गयी तो उन्होंने ऐसी किसी भी जानकारी होने से इंकार करते हुए कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया.

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