गोपालगंज में सैकड़ों पोखरों में पानी नहीं होने से पशु-पक्षियों के सामने जल संकट की समस्या

गोपालगंज के कटेया प्रखंड अंतर्गत सैकड़ों पोखरों में पानी नहीं रहने से भीषड़ गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों के सामने जल संकट की समस्या उत्पन्न हो गई है। वही विभागीय उदासीनता के कारण अधिकांश पोखरें भर चुके हैं। पहले गर्मी के मौसम में पोखरों में पशु-पक्षी पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते थे। गर्मी के मौसम में दोपहर के समय पक्षियों के चह-चहाने की आवाज से पेड़ के नीचे बैठे ग्रामीणों का मनोरंजन भी होता था। एक जमाना था जब किसानों की सिंचाई का मुख्य साधन पोखरे हीं थे। कहीं एकाएक आग लगने की घटना भी होती थी तो ग्रामीण पोखरे के पानी से आग पर काबू पा लेते थे। तलाब के सूखने का मुख्य कारण बारिश का नहीं होना भी है। साथ ही पोखरे में मौजूद मिट्टी को बाहर नहीं निकालने से भी तलाब दिन-ब-दिन भरते जा रहे हैं। आज घर का कूड़ा कचरा एवं घर की गंदी नाली का पानी पोखरे में बहाए जा रहे है।

इसके विपरीत पहले तालाब की मिट्टी को निकाल कर किसान अपने-अपने खेतों में डालते थे। जिससे किसान की फसल की उपज अच्छी होती थी। साथ ही पोखरे की गहराई भी बढ़ जाती थी। जिससे बरसात का पानी पोखरे में अधिक दिनों तक ठहरता था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रखंड में 200 पोखरे हैं। लेकिन गैर आधिकारिक तौर पर पोखरों की संख्या 300 से अधिक बताई जा रही है। आज किसी भी पोखरे का निरीक्षण किया जाए तो वहां पानी नगण्य होगा।

कटेया प्रखंड के खुरहुरिया गांव निवासी बबुना राय ने बताया कि पोखरा में गंदी नाली का बहाव एवं कुड़े-कचड़ों के जमा होने से भर गए हैं।साथ ही बारिश नहीं होने से अधिकांश पोखरे सूखे पड़े हैं। दूसरी तरफ अमरेश राय का कहना है कि आज भी पोखरे की सफाई अच्छी तरह करा दी जाए तो पानी की संकट दूर हो सकती है। वहीं मछुवारों का कहना है कि सभी पोखरों का डाक नहीं होता था। डाक न होने के बाद भी बहुत ऐसे पोखरे थे, जिसमें मछलियां अच्छी निकलती थी। जिससे मछुवारों की अच्छी कमाई होती थी। लेकिन पोखरा के सूखने की वजह से मछुवारों के बेरोजगार होने के साथ साथ पानी का संकट भी बढ़ गया है।

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