गोपालगंज: जानिए शब-ए-बारात की अहमियत और इस दिन इबादत करने के फायदे

आज शब-ए-बारात है। मुस्लिम आज रात भर तिलावत, ज़ियारत करेंगे। शब-ए-बारात सिर्फ गुनाहों की माफ़ी और मरहूमों के लिए दुआओं की रात नहीं है, बल्कि कौन पैदा होगा, किसकी इस दुनिया से रुखसती होगी। किसे दुनिया में क्या हासिल होगा। कितनी रोजी मिलेगी। किसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे। यानी हर मुसलमान की तकदीर इस रात तय हो जाएगी।

शब-ए-बारात के बारे में बताया जाता है की आज सिर्फ गुनाह ही माफ़ नहीं होंगे, बल्कि अल्लाह द्वारा अपने हर बंदे के लिए साल भर में होने वाले काम बांट दिए जाएंगे। पूरे साल का हिसाब-किताब भी अल्लाह द्वारा इस रात को किया जाएगा। पूरी दुनिया के मुसलामानों के लिए यह रात ख़ास है। इतनी ख़ास कि अपने बंदे की हर दुआ अल्लाह सुनते हैं। इसीलिए रात भर मस्जिदों में चहल-पहल होती है। लोग तिलावत करते हैं। कजा नमाज़ें पढ़ते हैं। कुरआन पढ़ते हैं। मस्ज़िद में मौलाना द्वारा की जाने वाली तक़रीर सुनते हैं। रात में इबादत के बाद रोजा रखा जाता है। शब-ए-बारात के दिन शाम होते ही अल्लाह की रहमत नाजिल होना शुरू हो जाती है।

शब-ए-बारात की रात अल्लाह ताआला इरशाद फ़रमाता है कि ‘कोई मगफिरत (गुनाहों की माफ़ी) का तलबगार है तो उसे बख्श दूं, कोई रिज्क (आशीर्वाद) का तलबगार है उसे रिज्क दूं। अगर कोई मुश्किलों में है तो उसे मुश्किलों से निजात दे दूं।’ अल्लाह इस रात बंदे के पिछले और अगले कर्मों का हिसाब करते हैं। यानी हर मुस्लिम के लिए ये रात फैसले कि रात होती है। आज सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि जो दुनिया से जा चुके हैं। उनके लिए भी दुआएं मांगी जाती हैं। खुद के लिए उनसे माफ़ी मांगते हैं और उन्हें जन्नत नसीब हो, उनकी रूह को सुकून मिले, इसके लिए अल्लाह से दरख्वास्त करते हैं। इसीलिए कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों की कब्र से रोशनी करते हैं। फूल मालाएं चढ़ाते हैं।

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