गोपालगंज की महिला ने अपनी लगन और मेहनत से डीएसपी बनने के सपने को किया साकार

गोपालगंज की एक 35 वर्षीय महिला ने अपनी लगन और मेहनत से जहा सफलता हासिल की है. वही इस महिला की दृढ इच्छा शक्ति ने एक घरेलु महिला को डीएसपी बनने के सपने को साकार कर दिखाया है. शादी के बाद जब महिलाये घरेलु काम और दिनचर्या की जिंदगी में सिमट कर रह जाती है. लेकिन गोपालगंज की इस दुर्गाशक्ति ने समाज और महिलाओ को एक नयी दिशा एक नयी उम्मीद दिखाई है. आज वह डीएसपी बनकर अपने समाज और महिलाओ के लिए कुछ अलग करना चाहती है.

गोपालगंज के हजियापुर रोड स्थित वार्ड नम्बर 11 की रहने वाली महिला कुमारी दुर्गाशक्ति जिसकी महज 18 वर्ष की उम्र शादी हो गयी थी. वह पढना चाहती थी. कुछ कर गुजरना चाहती थी. लेकिन घरवालो ने उसकी शादी कर अपनी जिम्मेदारी ख़त्म कर ली. लेकिन दुर्गा कुछ और करना चाहती थी.

दुर्गा शक्ति का कहना है कि उसकी 2002 में शादी हो गयी थी. शादी के बाद वह घरेलू काम में व्यस्त हो गयी. लेकिन उसमे पढने और कुछ कर गुजरने की ललक थी. उसने अपनी पति की मदद से पढाई की. घरेलु काम और अपने इकलौते बेटे की सेवा करते हुए दुर्गाशक्ति ने पीसीएस की तैयारी शुरू की. आज शादी के 17 साल बाद वह डीएसपी बन गयी है. उसका चयन बिहार पुलिस सेवा में हुआ है. यहाँ वह ट्रेनिंग खत्म कर डीएसपी बन गयी है.

अब दुर्गा डीएसपी बनकर महिलाओ के खिलाफ हो रहे घरेलु हिंसा और भेदभाव के खिलाफ लड़ना चाहती है. दुर्गा ने अपनी सफलता के लिए पति , पिता सास ससुर के साथ सभी रिश्तेदारों को श्रेय दिय है. दुर्गा ने अपनी मैट्रिक की पढाई से लेकर ग्रेजुएशन की पढाई सबकुछ गोपालगंज के सरकारी स्कूल से की है. फिर उसने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी और पटना से बीएड की पढाई पूरी की. लेकिन इस सबके बीच उसने तैयारी की और अब डीएसपी बनकर उसने अपने परिवार और और समाज को एक नयी दिशा दी है.

कुमारी दुर्गाशक्ति के पति अशोक कुमार के मुताबिक उनकी पत्नी में लगन और मेहनत को देकर उन्होंने पढाई जारी रखने की सलाह दी. अपनी पत्नी का हर संभव मदद किया जिसकी बदौलत आज उनकी पत्नी डीएसपी बन गयी है.

दुर्गा के इकलौते 13 वर्षीय बेटे कुणाल को अपनी माँ की सफलता पर फक्र है. कुणाल अपनी माँ की तरह आईएएस बनना चाहता है.

वही दुर्गा के पिता अनिरुद्ध साह ने बताया कि उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है. उन्होंने अपनी बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं समझा. समाज और लोगो से बस यही अपील करना चाहते है कि अब लोग बेटिओं और बेटे में कोई फर्क नहीं करे.

कुमारी दुर्गाशक्ति ने अपनी मेहनत और लगन से यह जाहिर कर दिया है की कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. बस दृढ इच्छाशक्ति होनी चाहिए. साथ दुर्गा ने उनलोगों के लिए भी एक मिसाल पेश की है जो बेटों और बेटियो में फर्क करते है.

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