Fri. Aug 23rd, 2019

गोपालगंज के चनावे मंडल कारा की बदलती फिज़ा, कैदी जेल की बंजर भूमि पर उगा रहे सब्जियां

गोपालगंज जेल कभी कुख्यात कैदियो के लिए जाना जाता था। लेकिन अब यहाँ सब कुछ बदल गया है। यहाँ जेल में बंद कुख्यात कैदी अपराध की बात नहीं करते। बल्कि वे अपनी मेहनत से जेल परिसर की बंजर भूमि पर सब्जियां उगा रहे है। ये जैविक सब्जियां ताज़ी होने के साथ साथ बिहार सरकार की राजस्व का भी बचत कर रही है।

गोपालगंज के थावे में स्थित चनावे मंडल कारा अपने लगातार सकारात्मक प्रयास की वजह से सुर्खिओं में है। इन दिनों जेल में एक और सकारात्मक बदलाव देखने मिल रहा है। यहाँ कई संगीन अपराध की सजा में जेल में बंद कैदी खुद अपने हाथो से खेती कर रहे है।
जेल परिसर में बेकार पड़ी बंजर और खाली जमीन पर सब्जी का उत्पादन कर रहे है।

जेल अधीक्षक संदीप कुमार के मुताबिक वर्तमान में जेल में करीब सात सौ कैदी बंद है। इन कैदियो में 70 कैदी रोजाना जेल परिसर की खाली जमीन पर सब्जी की खेती कर रहे है। इन सब्जिओ में बैगन, गोभी, पलक, आलू सहित अन्य सीजनल सब्जियां शामिल है। जिनके उपयोग जेल में कैदियो के खाने के लिए किया जाता है। सब्जिओ की पर्याप्त मात्रा में उत्पादन से सप्ताह में करीब चार से पांच दिन इन सब्जिओ से ही जेल की खपत की भरपाई कर ली जाती है। जिसकी वजह से सरकार का करीब 40 हजार रूपये राजस्व की बचत हो जाती है। जेल अधीक्षक के मुताबिक कैदियो और जेल कर्मिओ के प्रयास से वैसे दुसरे कैदियो को भी सब्जी और खेती की तकनीक बताई जा रही है। जो खेती बारी से अज्ञान है। इन कैदियो को रोजाना प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसमे सब्जी उत्पादन, मछली उत्पादन सहित अन्य जीवकोपार्जन के काम शामिल है। ताकि जेल से छूटने के बाद ये कैदी दोबारा अपराध की दुनिया में न जाकर बल्कि समाज की मुख्य धारा में रहकर सामाजिक कार्य कर सके।

बता दे की गोपालगंज मंडल कारा सूबे की उन जेलों में शामिल है जहा इग्नू ने स्टडी सेण्टर खोलने की मंजूरी दी है। जिसमे कैदी जेल में रहने के दौरान भी अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।

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