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गोपालगंज में धूमधाम से मनाया गया ईद मिलादुन्नबी, शहर में शानो शौकत से निकला जुलूस

गोपालगंज समेत पुरे देश में जश्‍ने ईद मिलादुन्नबी बुधवार को मनाया गया। इसके तहत शहर में शानो शौकत के साथ जुलूस निकाला गया। मदरसा चिश्तिया अनवारुल कुरान तिरबिरवां की ओर से सुबह 9 बजे से जुलूस शुरू हुआ। जो शहर के मुख्य मार्ग मौनिया मोड़ , पुरानी चौक, घोष मोड़, अम्बेडकर चौक, जंगलिया मोड़ से होते हुए पोस्टऑफिस एवं N H 28 पर समाप्त हुआ। जुलूस में सबसे आगे आगे तिरबिरवां के बुद्धिजीवी व्यक्तियों का काफिला था। इसके पीछे ओलेमा नातख्वानी पढ़ते चलें। मदरसों के बच्चे भी काफी तादाद मे मौजूद रहें।

मदरसा के हेड मदारिस सहिम शहीद रहमानी ने बताया कि आज़ दुनिया के हर शहर में हर गली कूचे में यह जुलूस निकाला गया है क्योंकि आज़ इस्लाम के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्मदिन है। हजरत मुहम्मद के जन्मदिन यानी योमे पैदाइश के मुबारक मौके पर उनकी याद में यह जुलूस ए मोहम्मदी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदरसा चिश्तिया अनवारुल कुरान तिरविरवां के जानिब से निकाला गया। हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म 12 रवि अव्वल मुताबिक 20 अप्रैल 571 ईसवी में सोमवार के दिन भोर में अरब के महसूर शहर मक्का शरीफ में हुआ। उनकी आमद से पहले पूरी दुनिया में नफरत की आग फैली हुई थी। खासतौर पर अरब और मक्का का हाल बहुत ही बुरा था। इंसान में इंसानियत नहीं थी। आदमी में आदमियत नहीं थी। इंसानियत सिसक रही थी। आदमीयत का जनाजा निकल रहा था। लोग दरिंदा सिफत बन चुके थे। कहीं लड़कियां जिंदा जलाई जाती थी तो कइयो को जिंदा जमीन में पैदा होते ही गाड़ दिया जाता था। गोया की जुल्मों तशदुद (बोलबाला) का परचम शान से लहरा रहा था। हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम आए तो इंसान की इंसानियत का पाठ पढ़ाया। आदमी को आदमीयत का दर्ष दिया। अमन और शांति सलामती का परचम लहराया। लड़कियों को रहमत करार दिया। नाहक खून बहाने को अजीम जुर्म करार दिया। पैग़ंबरे इस्लाम ने यतीमो को संभाला, बेवाओ को यानी विधवाओं को नवाजा गरीबों के सर पर शफकत का हाथ रखा। गिरते को उठाया, शराबियों को पाकबाज़ किया, बेकारों का कारसाज किया। पैग़ंबरे इस्लाम ने फरमाया की किसी का दिल ना दुखाओ, भूखों को खाना खिलाओ, मोहताजं का हाजत पूरी, करो प्यासे को पानी पिलाओ, नंगों को कपड़ा पहनाओ, विधवाओं को मंसूस मत समझो उन पर रहम करो, यतीमो का ख्याल रखो, बूढ़ों का इज्जत करो, मां बाप की खिदमत करो। आइए हम सब मिलकर इस जश्ने ईद मिलाद ए नबी के मौके पर हम उनके पैगाम पर अमल करने का अहद करें यानी शपथ ले ताकि हमें ईद मिलाद की हकीक खुशियां हासिल हो।

गौरतलब है की इस बार मौलाना मजहरुल हक फाउंडेशन की जागरुकता दिखाने से जश्ने ईद मिलादुन्नबी में डीजे का प्रयोग बहुत ही कम दिखा या यूँ कह की ना के बराबर दिखा। इस मुहिम को मौलाना मजहरुल हक फाउंडेशन के शाह आलम, सक्रिय मेंबर मोहम्मद इरफान अली गुड्डू, आफताब हुसैन, सुभान, छोटे मुखिया, असलम मुखिया, लाएक हुसैन इत्यादि लोगों ने इस मुहिम को चालू किया था। जिसके बाद जिले में ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत में इसका असर हुआ।

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