गोपालगंज में स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पहुँचते है स्कूल, हो सकता है कभी भी बड़ा हादसा

गोपालगंज जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अमृतसर हादसे के बाद भी सबक लेने को तैयार नहीं है. यहाँ गोपालगंज में कई सरकारी स्कूल ऐसे भी है. जहा बच्चो को अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिदिन स्कूल जाना पड़ता है. यहाँ पढने वाले सैकड़ो बच्चे प्रतिदिन रेलवे ट्रैक पर चलकर स्कूल पहुचते है. जो कभी भी किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है.

उचकागांव प्रखंड का मिडिल स्कूल सुकुलवा में क्लास सिक्स से लेकर आठवी तक पढाई होती है. यहाँ छात्रो की संख्या 292 है. जिसमे करीब एक सौ बच्चे उचकागांव प्रखंड के नरकटिया और पसरमा गाँव से पढने आते है. यह स्कूल सुकुलवा गाँव में स्थित है. लेकिन पसरमा और नरकटिया गाँव में कोई भी मिडिल स्कूल नहीं होने की वजह से इन गांवो के बच्चे भी इसी मिडिल स्कूल में पढने आते है. मिडिल स्कूल सुकुलवा के प्राचार्य संजय कुमार सिसोदिया का कहना है की यहाँ 292 बच्चो में से करीब एक सौ बच्चे पसरमा और नरकटिया से पढने आते है. यहाँ बच्चो को प्रतिदिन आना जरुरी भी है और रेलवे ट्रैक पार करना उनकी मज़बूरी भी है. इसलिए प्रतिदिन बच्चो को हिदायत दी जाती है की वे सावधानी से रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल पढने आये. इन बच्चो के पास इसके अलावा और भी कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है. प्रिंसिपल के मुताबिक हमेशा बच्चो के जान का खतरा बना रहता है.

मिडिल स्कूल सुकुलवा यहाँ का कोई अकेला स्कूल नहीं है. जहा के बच्चे प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पढने जाते है. इसी स्कूल की तरह कुचायकोट प्रखंड का एनपीएस यानी नवसृजित प्राइमरी स्कूल पाण्डेय परसौनी भी है. जहा स्कूल में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है. जिसकी वजह से इस स्कूल में जाने के लिए रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल पहुचना पड़ता है. इस स्कूल के बच्चो से लेकर शिक्षक सभी इसी थावे गोरखपुर रेलखंड को पार कर स्कूल पहुचते है.  अभिभावकों और बच्चो के मुताबिक हमेशा ट्रेन से दुर्घटना का आशंका बना रहता है. कभी भी कोई बड़ा हादसा न हो जाये. इसलिए बच्चो को उनके अभिभावक रोजाना स्कूल छोड़ने आते है. वही बच्चे कहते है की उन्हें ट्रेन से कटने का डर हमेशा लगा रहता है.

इस मामले में जब गोपालगंज शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा पदाधिकारी अखिलेश्वर प्रसाद का कहना है की उन्हें ऐसे किसी स्कूल की जानकारी नहीं थी. जहा के बच्चे ऐसे रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल जाते है. जहा जान का खतरा बना रहता है. इसलिए वे अपने अधीनस्थ अधिकारिओ से बात कर खुद मामले की जांच करेंगे और इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी.

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