गोपालगंज में जदयू के कार्यकर्ताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री को दी श्रद्धांजलि

गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के करसघाट में पूर्व प्रधानमंत्री स्व० अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर जदयू के सैकड़ो कार्यकर्ताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर दिवंगत प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर पहुंचे जदयू के प्रदेश महासचिव सह बैकुंठपुर के पूर्व विधायक मंजीत सिंह आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए दिवंगत प्रधानमंत्री के राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के राजनैतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि अटल जी आजादी के पूर्व ही राजनीति में आ गए थे। उन्होंने गांधी जी के “अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन” में भी हिस्सा लिया था तथा कई बार जेल की यातनाएं भी सहीं। वो बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। अपनी मातृभाषा हिन्दी से उनका खास लगाव था। यूएन जेनरल एसेम्बली में हिन्दी में भाषण देनेवाले वो पहले राजनेता थे। एक सच्चे देशभक्त के साथ साथ एक अच्छे कवि भी थे। अपनी कविता एवं व्यंग्य से राजनैतिक जीवन में भी सबको चकित कर देते थे। कई समाचार पत्रों के संपादक भी रहे थे।

पूर्व विधायक ने अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल के दौरान लिए गए ऐतिहासिक फैसलों की चर्चा करते हुए कहा कि अटल जी के कार्यो को देश कभी भूला नहीं सकता। पोखरण में किए गए सफल परमाणु परीक्षण, नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना एवं कारगिल युद्ध सहित कई उपलब्धियों को देश हमेशा अटल जी के नाम से याद करेगा। उन्हें 1992 में उन्हें पद्मभूषण, 1994 में बेस्ट सांसद का अवार्ड तथा 2014 में भारत के सर्वश्रेष्ठ भारतरत्न की उपाधि से नवाजा गया। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी उन्हें भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह कहते हैं।

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पटना स्थित नवनिर्मित संग्रहालय का नाम अटल संग्रहालय रखने की मांग की है। अटल जी की कविताओं को स्कूल कालेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने तथा उनक संसदीय जीवन में उनके द्वारा दिए गए भाषणों को बिहार दिवस के अवसर प्रसारित कर जन जन तक पहुंचाने की मांग की।

पूर्व विधायक सहित जदयू के तमाम कार्यकर्त्ताओं ने मांग किया कि झझवा-पकडी में नवनिर्मित अस्पताल का नामकरण अटल अस्पताल करने, डुमरियाघाट में बने रहे पुल का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम करने तथा नारायणी के तट पर जहां अस्थि विसर्जन किया जा रहा है वहां पार्क बनाकर उसका नामकरण अटल उद्यान करने के साथ-साथ बंगरा घाट एवं सत्तर घाट में बन रहे महासेतु का नाम अटल सेतु करने की मांग की है।

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