गोपालगंज के तीन छात्रो ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा यूपीएससी में गाड़े अपनी कामयाबी का झंडा

 इस बार यूपीएससी की परीक्षा में पुरे देश की तरह बिहार के ही छात्रो ने अपना परचम नहीं लहराया है. बल्कि गोपालगंज के 03 छात्रो ने भी एक साथ अपनी कामयाबी के झंडा गाड़े है. इस बार यह पहली बार हुआ है जब देश की सबसे बड़ी परीक्षा यूपीएससी में जिले के 3 छात्रो ने सफलता हासिल की है.
जानकारी के मुताबिक थावे के बेदुटोला के रहने वाले सनी कुमार सिंह को इस परीक्षा में 91 वा रैंक हासिल हुआ है. जबकि कुचायकोट के लोहारपट्टी के रहने वाले अंशु कुमार ने 163 वा रैंक हासिल किया है. अंशु कुमार आईआईटी दिल्ली से बीटेक किये है. वे कुचायकोट के लोहारपट्टी गाव के रहने वाले प्रभुनाथ प्रसाद श्रीवास्तव के बेटे है. इसके अलावा बैकुंठपुर के कतालपुर के रहने वाले पुष्कर शर्मा ने भी यूपीएससी की परीक्षा में 228 वा रैंक हासिल किया है. पुष्कर शर्मा के पिता इंजिनियर जेके शर्मा यूपी के देवरिया में बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता है.
लेकिन आज हम जिस व्यक्ति की बात कर रहे है. उसका नाम प्रभुनाथ सिंह है. वे मजदुर है. और अपनी काबिलियत और मेहनत से अपनी बेटे सनी कुमार सिंह को देश की प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा में कामयाबी दिलाई है. 55 वर्षीय प्रभुनाथ का सीना अब गर्व से चौड़ा है. आखिर इसकी एक खास वजह भी है. क्योकि प्रभुनाथ सिंह अब कोई मामूली इंसान नहीं. बल्कि वे एक आईएएस के बेटे है. जिसका नाम सनी कुमार सिंह है.
थावे के बेदुटोला के रहने वाले प्रभुनाथ सिंह के मुताबिक उनके पास सिर्फ दो बीघे जमीन थी. जिससे खेती कर उनके परिवार का मुश्किल से खर्च निकल पाता था. फिर वे सूद पर और अपने रिश्तेदारों से पैसे लेकर विदेश में नौकरी करने गए. वे वहा पर स्टील फिक्सर का काम कर मजदूरी में मिले पैसे को भारत भेजते थे. इसी पैसे से उन्होंने अपने बेटों को गोपालगंज के सेंट जोसेफ स्कूल से मैट्रिक की पढाई करवाई.
प्रभुनाथ अपने इकलौते बेटे को पढ़ाने के लिए मस्कत में रहे, फिर दोहा क़तर में नौकरी की. इस दौरान उन्हें सुचना मिली की उनके इंजिनियर बेटे को प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गयी. प्रभुनाथ ने मजदूरी नहीं छोड़ी. वे विदेश में ही रहकर अपने बेटे को कुछ काबिल बनाना चाहते थे. फिर उनके बेटे को केंद्र सरकार की गृह विभाग में अधिकारी का पद मिला. इसके बावजूद प्रभुनाथ सिंह ने हार नहीं मानी. उन्होंने अपने बेटे को आईएएस बनाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे.
प्रभुनाथ सिंह ने कहा की इस साल 2017 बैच की परीक्षा में उनके बेटे को 91 वा रैंक मिला. तब जाकर उन्हें तसल्ली मिली. इस कामयाबी में उनके बेटे के साथ साथ अपने शुभचिंतको का सहयोग मिला. प्रभुनाथ सिंह के पत्नी विन्ध्वसिनी देवी के मुताबिक उनका बेटा जब ढाई साल का था. तब से ही वे अपने बेटे को आईएएस ही बनानी चाहती थी. इसके लिए पति पत्नी ने बहुत बलिदान दिया. कई बार वे भूखे पेट सो जाते थे. फिर अपने रिश्तेदारों से अपने भाईयो से और अपने पिता से पैसे मांगकर बेटे को पढ़ाया. और आज कामयाबी उसके कदम चूम रही है.
सनी कुमार सिंह के मामा बिरेन्द्र सिंह के मुताबिक उनका भांजा शुरू से ही मेधावी था. लेकिन उस परिवार में पैसे की किल्लत शुरू से रही. इस किल्लत में उनका भी आर्थिक सहयोग रहा . जिसकी बदौलत उनके भांजे ने यह मुकाम हासिल किया है.
आज अपने बेटे को कामयाब बनाने के लिए एक पिता की यह संघर्ष गाथा किसी फ़िल्मी कहानी से कम रोचक नहीं है. बस जरुरत है अपने दृढ हौसले से कामयाबी हासिल करने तक मेहनत करने की.

One thought on “गोपालगंज के तीन छात्रो ने देश की सबसे बड़ी परीक्षा यूपीएससी में गाड़े अपनी कामयाबी का झंडा

  • May 2, 2018 at 6:36 pm
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    रिपोर्टिंग कर के एक बार पढ़ भी लेना चाहिए

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