गोपालगंज: डॉक्टर ने गर्भवती महिला की यूरिन नली को बंद कर पहुँचाया मौत के कगार पर

गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान राज किशोरी सेवा संस्थान में भर्ती कराया गया । जहां डा. अवनीश कुमार ने ऑपरेशन के दौरान महिला के यूरिन की नली को ही काट कर उसे नाजुक स्थिति में भेज दिया है . नर्सिंग होम में तीन दिनों तक मरीज को रखने के बाद जब स्थिति गंभीर हो गयी तो उनलोगों ने बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया . जबकि पेशाब की नली कटने से महिला के बच्चे की भी मौत हो गयी. लोगो के हंगामा करने के बाद मौके से डॉक्टर फरार हो गया है .

सूत्रों से मिली खबर के अनुसार उत्तरप्रदेश के देवरिया जिला के सिरिसिया गाँव निवासी रामप्रवेश पासवान की पत्नी रीना देवी अपने मायके भोरे थाना क्षेत्र के डूमर नरेन्द्र गाँव आयी थी . चार दिन पूर्व प्रसव पीड़ा होने पर महिला को भोरे रेफरल अस्पताल लाया गया जहाँ डॉक्टर्स ने निजी क्लिनिक में ले जाने की सलाह दी. जिसके बाद परिजनों ने राजकिशोरी सेवा संस्थान क्लिनिक में रीना को भर्ती कराया ।

परिजनों ने बताया की डॉक्टर अवनीश कुमार ने ऑपरेशन के दौरान पेशाब की नली काट दी जिससे बच्चे की मौत हो गयी और महिला की स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती गयी . तीन दिनों के बाद स्थिति को गंभीर होते देख महिला को बाहर ले जाने की सलाह दी गयी. महिला को गोरखपुर हॉस्पिटल में ले जाने के बाद पता चला की महिला को ऑपरेशन के दौरान यूरिन नली को काट कर सील दिया गया है जिससे महिला की स्थिति गंभीर हो गयी है .

मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने तुरंत उस नर्सिंग होम में पहुंचकर हंगामा करना शुरू कर दिया ।जिसके बाद मौके से डॉक्टर अवनीश कुमार फरार हो गया . मामले की गंभीरता को देख तुरंत मौके पर पुलिस पहुँची और मामले को शांत कराया . लोगो ने नर्सिंग होम में तोड़ फोड़ करने की कोशिश बहुत की पर प्रशासन की मौजूदगी में कुछ भी नही हो पाया वैसे बीडीओ सोनू कुमार ने आश्वासन दिया है की मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपित डॉक्टर को गिरफ्तार व नर्सिंग होम को सील कर दिया जाएगा . समाचार लिखे जाने तक कोई भी कारवाई प्रशासन व पुलिस के तरफ से न ही नर्सिंग होम पर और न ही डॉक्टर की जा सकी है .

यहां सवाल यह उठता है की आखिर प्रशासन के नाक के नीचे कैसे फर्जी नर्सिंग होम चल रहे है जो लगातार लोगो को मौत की नींद सुला रहे है . किसी भी नर्सिंग होम को बिना पंजीकृत कराये कैसे कोई झोला छाप डॉक्टर लोगो के जीवनदाता बन जाते है . आम लोगो के जीवन के सौदागर बने हुए नर्सिंग होम पर कारवाई के लिए शायद किसी प्राथमिकी की जरुरत नही बल्कि जांच कर कारवाई करने की इच्छाशक्ति की जरुरत है .वरना आये दिन इसी तरह से किसी मां और किसी बच्चे की बली चढ़ते रहेगी .

 

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