गोपालगंज में पुरे जोर-शोर से हो रही सरस्वती पूजा की तैयारी, सोमवार को होगी पूजा

माघ का महीना आते ही लोग बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा की तैयारी में जुट जाते हैं। बसंतपंचमी के दिन मनाई जाने वाली ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा लोग बड़े ही धूम-धाम और हर्षोल्लास से करते हैं। पूजा के लिए महीनों पहले से चल रहा मूर्ति निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण पर है।

गोपालगंज में कई जगहों पर कुंभकारों की टोली मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इस बार बढ़ती महंगाई ने प्रतिमा निर्माण पर भी अपना असर डाला है।

बाजार में बढ़ती महंगाई का असर मूर्तियों पर साफ नजर आ रहा है। एक फुट से लेकर सात फुट तक की मूर्तियों की कीमत इस साल 100 रुपए से 5000 तक है। सरस्वती पूजा मनाने वाली विभिन्न समितियां अपने-अपने बजट के हिसाब से मां सरस्वती की प्रतिमा ले रही हैं। इनमें शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक की पूजा कमीटियां शामिल हैं।

गोपालगंज में सरस्वती पूजा को लेकर छात्रों और अभिभावकों में गजब का उत्साह देखा जा रहा है। महंगाई के बावजूद हर सड़क-गली में पूजा समितियां हर्षोल्लास के साथ सरस्वती पूजा की तैयारियां कर रहीं हैं। वहीं, मूर्ति की खरीदारी करने आये विकास कुमार से जब हमने बात की, तो उनका कहना था कि मंहगाई तो काफी बढ़ गयी है। हमलोगों ने अपने दूसरे खर्चों में कटौती की है, लेकिन मंहगाई को आस्था पर भारी नहीं पड़ने देंगे।

कुंभकार उमेश कुमार पंडित का कहना है कि एक मूर्ति को बनाने में 5 से 7 दिन का समय लग जाता है, जबकि अब शहर में न तो मिटटी मिलती है, न घास और न ही बांस। पिछले साल जिस मिट्टी में लागत 400 रूपये लग रही थी, उनका दाम इस साल बढ़कर दोगुना यानी कि 800 रुपये हो गया है। इसके बावजूद हमलोगो को उचित मेहनताना भी नहीं मिल पाता है।

वहीं दूसरी तरफ कुंभकारो का यह भी कहना है कि हमारे रोजगार पर न तो पहले की सरकार ने ध्यान दिया और न ही वर्तमान सरकार कोई मदद कर रही है। हम अपना पारम्परिक काम कर जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहे हैं। उपेक्षाओं और करियर संभावनाओं के अभाव में नई पीढ़ी इस कला से दूर होती जा रही है।

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