गोपालगंज जिले में आशा कार्यकर्ताओ के गंदे खेल से नवजातो की हो रही है मौत

गोपालगंज जिले के तमाम प्रखंडों मे महिलाओं के लिए प्रसव जोखिम भरा साबित हो रहा है.प्रसव पीड़िता को गांव घर से उसके परिजन इलाज के लिए सरकारी अस्पताल की ओर चलते तो हैं परन्तु सरकारी अस्पताल तक पहुंचने से पहले आशा कार्यकर्ता इन्हें अपने बहकावे मे लेकर पीड़ित को पहले से सेटिंग वाले व दोहन करने वाले प्राइवेट नर्सिंग होम में पहुंचा देती है . जहां उनका जमकर आर्थिक शोषण होता है और आशा कार्यकर्ता को इसके बदले मोटी रकम मिल जाती है.

जहाँ तक इस खेल का है यह खेल नया नही बहुत पुराना है. सरकारी अस्पताल मे प्रसव पीडिता को बच्चा जनने पर आशा कार्यकर्ता को मात्र छ:सौ रूपये ही मिलते हैं परन्तु प्राइवेट नर्सिंग होम वाले हजारों हजार देकर आशा कार्यकर्ताओं को मालामाल कर डालते हैं. जिसके लालच में आकर आशा कार्यकर्ता अवैध नर्सिंग होम में बगैर किसी सुविधा के लिए पीडिता व उसके जन्मे बच्चे को मौत के सामने लाकर खड़ा कर देती है .

ऐसा ही एक घटना कुछ दिनों पूर्व घटी थी . बैकुण्ठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की एक आशा कार्यकर्ता ने ऐसा ही कुकृत्य कर दिया था,जिसमे प्रसव पीडिता के साथ नवजात की मौत हो गयी थी और नर्सिंग होम के फर्जी डॉक्टर फरार हो गये थे.आशा कार्यकर्ता पकड़ी गयी,धुनाई हुयी और जब मामला गरमाया तो स्वास्थ्य विभाग ने उसे हटा भी दिया.

बीते 25नवम्बर को बैकुण्ठपुर प्रखंड के रेवतीथ गांव की एक प्रसव पीडित को उसी गांव की आशा कार्यकर्ता सरकारी अस्पताल से बहका कर दिघवादुबौली के एक अवैध नर्सिंग होम मे ले गयी जहां नार्मल प्रसव हुआ.लेकिन जब मरीज के घर जाने की बारी आई तो उक्त नर्सिंग होम के कर्मियो ने इकीस हजार रूपये की मांग रखी.जद्दोजेहाद और पैरवी के बाद मामला पचास प्रतिशत पर सुलझा.

विदित हो कि ऐसे नर्सिंग होम मे न तो कोई एमबीबीएस डॉक्टर आता है न ही नर्सिंग होम के मानक लायक वह भवन होता हैं कुकुरमुते की तरह उग आए ऐसे नर्सिंग होम सरकारी अस्पताल के अगल बगल ही चलते हैं पर विभाग के अधिकारी मूक दर्शक बने रहते हैं.अजीब स्थिति उत्पन्न हो गयी है.यही नही माह के प्रत्येक नौ तारीख को गर्भवती महिलाओ की सरकारी अस्पतालो मे जांच होती है.बिना डॉक्टर के सलाह के आशा कार्यकर्ताए गर्भवती महिला को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड वाले के यहां पंहुचा देती हैं और उसमे कमीशन कमा लेती हैं.यह गोरख धंधा बदस्तूर जारी है और मरीजो के जीवन से खिलवाड़ तो किया ही जाता है आर्थिक दोहन भी किया जाता है

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