गोपालगंज में छठव्रती गंदे पानी में अर्घ्य देने को मजबूर,प्रशासन व नगर परिषद की खुली पोल

जिले के हजारों छठव्रतियों को नदी के गंदे पानी में अर्घ्य देने की मजबूरी है. नदी का पानी अत्यंत ही प्रदूषित हो चुका है. नदी के तट पर सैकड़ों छठ घाट स्थित है जहां छठ के मौके पर श्रद्धालु अर्घ्य देते हैं. कभी गोपालगंज जिले के सैकड़ों गांवों की लाइफ लाइन रही इस नहर को आज प्रदूषण से मुक्ति की दरकार है. औद्योगिक कचरे व नालों के प्रदूषण से नहर त्राहिमाम कर रही है, पर उसकी सुधी लेने वाला कोई नहीं है. कालक्रम में शासन-प्रशासन द्वारा नदी की सफाई की घोषणाएं डपोरशंखी  साबित हो रही है. वहीं, यहां पसरी गंदगी के बीच अर्घ्य देने को मजबूर है छठव्रती. इससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है .

प्रशासन और नगर परिषद् ने छठ पूजा को लेकर एक दिन पूर्व ही अपनी तैयारियों का घोषणा कर दिया है पर कई छठ घाट ऐसे भी है जहाँ सजावट तो बहुत किया गया है पर छठव्रतियो की मुख्य रूप से सूर्य को अर्घ्य देने की कोई विशेष व्यवस्था धरातल पर नही दिखा . महिलाओ को अर्घ्य देने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. हर वर्ष इस नहर में छठ को लेकर पानी छोड़ने की बात की जाती है पर वो सभी नाकाफी साबित होता है .

दिल्ली की यमुना के गंदे पानी की चर्चा तो पुरे देश भर में होती है पर बिहार के गोपालगंज शहर के नोनिया टोली स्थित घाट नंबर 1 पर जो दशा को देखने को मिली वो हमे शर्मशार करने के लिए काफी है .बाते तो बहुत करते है की छठ ऐसे हो तो वैसे हो पर क्या जनप्रतिनिधि और क्या हमारा प्रशासन को ये नजारा नही दिखता की कूड़े और कचड़े में फैला पूरा घाट पूजा की एक अलग ही गाथा लिख रहा है. जिस बिहार  का मुख्य पर्व ही यही है जब यहाँ की दशा ऐसी है तो हम कैसे किसी और को दोषी ठहरा सकते है . प्रशासन को इस तरफ एक आवश्यक कदम उठाने की जरुरत है जिससे इस महान पर्व को और हर्षोल्लास से मनाया जा सके .

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