गोपालगंज में फैशन डिजाइनिंगर ने मेंथा की खेती कर बदल दी गांव की तकदीर

सीढियां उन्हें मुबारक हो जिन्हें छतों तक जाना है, जिसकी मंजिल आसमां है, उसे रास्ता स्वयं बनाना है” यह पंक्तियां किसी शायर की लिखी हुई नही अपितु उस किसान के स्वयं की आवाज है जिसनें इस विपरीत परिस्थितियों में भी एक नया इतिहास रच रहा है. आये दिन जहां देश में किसान खेती कर आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, वहीं गोपालगंज जिले के किसान सिधवलिया प्रखंड के शेर गांव निवासी किसान आदर्श कुमार फैशन डिजाइनिग का कोर्स कर कही नौकरी की तलाश नही कर खुद अपनी तक़दीर लिख डाली तथा गांव के लोगो को भी खेती की नई सीख दे डाली.

जो गांव किसी जमाने में खैनी की खेती के क्षेत्र में बादशाहत हासिल किया था. आज उसी गांव में लोग पीपरामेंट की खेती कर अपनी कमाई में चार चांद लगा रहे है. इस भीषण गर्मी और तपती धूप में जहां धरती भी सफेद हो जाती है वहीं पर एक किसान के जज्बे ने पिपरमेंट के पौधो की ऐसी हरियाली बिखेर दी है कि हर देखने वाला उस किसान के जज्बे को सलाम करता है

.गोपालगंज जिले का शेर गांव जहां कभी तम्बाकू की खेती बहुतायत मात्रा में होती थी और जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता था. आज उसी धरती ने मेंथा पिपरमेंट के औषधीय पौधों से अपना गोद भर लिया है और किसान खुशहाल हैं. दूर दूर तक मेंथा पिपरमेंट के हरे हरे लहलहाते पौधे ही नज़र आते हैं अगहरा के चंवर मे. कभी यह भूमि बेकार और बंजर हुआ करती थी. आज यह धरती औषधीय पौधो से इतना हरा-भरा दिखाई देता है जैसे लगता है की प्रकृति अपनी पूरी छटा इस बंजर जमीन पर ही बिखेर दिया है.

शेर गांव के किसान के बेटे ने कमाल कर दिया है

जिस देश मे खेती की बेवफाई से किसान आत्महत्या करते है उसी देश और राज्य मे शेर गांव के किसान के बेटे ने फैशन डिजाइनिंग करने के बाद भी खेती को अपना रोजी रोटी का जरिया बनाकर समाज की सोच मे बदलाव के लिए एक सार्थक प्रयास किया है. शेर गांव मे खैनी की खेती की परम्परा को जहां विराम लग गया है वही अब औषधीय खेती यहां के लिए वरदान साबित हो रही है.

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