गोपालगंज का बैकुण्ठपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चरमराई स्वास्थ्य सेवाये

बिहार के तमाम अस्पतालों मे मरीजो की सेहत के लिए सरकारी स्तर से चाय, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था चलायी जा रही है. इस कार्य मे आउटसोर्सस लगाये गये हैं. जिन्हे अस्पताल की साफ सफाई की व्यवस्था भी करनी है परन्तु गोपालगंज जिले के चालीस शैय्या वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बैकुण्ठपुर की हालत ही विपरीत है.

स्वच्छ भारत मिशन के सपने को मानो यहां ग्रहण लग गया है. अस्पताल के सामने पड़े कूडे कचरे को लवारिस कुत्ते अक्सर उकेरते रहते हैं. वाहन पड़ाव के रेलिंग पर फूल पतियों की जगह जंगल उग आए हैं. चालीस बेड वाले इस अस्पताल के आउटसोर्सस की हद तो यह है कि यहां मरीजों को मिलने वाला भोजन, चाय, बिस्कुट भी नही मिल पाता है. किचेन मे चावल, दाल, आटा सबकुछ नदारद है. बस एक तसला और गैस का चूल्हा मरीजो को दिए जाने वाले आहार का मूक गवाह है.

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बैकुण्ठपुर मे मरीजो के लिए खाना पकाने वाली रसोइया ललिता देबी स्पष्ट तौर पर कहती है कि उसे जो मिलता है वही बनाती है. इस संबध मे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजय कुमार अभी कुछ कह नही रहे है कि व्यवस्था की जायेगी की नही कि जायेगी. अस्पताल की स्थिति यह है कि किसी मरीज के बेड पर चादर तक नही रहता. मरीजों को अपना चादर और भोजन खुद ही लाना पड़ता है. वही अस्पताल मे चादर और पर्दा धोने वाली एक महिला को आउटसोर्सर द्वारा आर्थिक शोषण किया जा रहा है. आर्थिक तंगी की शिकार महिला के हजारों रूपये आउटसोर्सर के जिम्मे बकाया है और आउटसोर्सर कम पैसे पर मजदूरी करवा रहा है.

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