गोपालगंज के सिधवलिया प्रखंड का महादलित बस्ती आज भी विकास से है कोसो दूर

गोपालगंज जिला के सिधवलिया प्रखंड के शेर पंचायत के मटौली गांव मे आज भी लोग भुखमरी के शिकार बने हुए है. बिहार सरकार की हजारो योजनाएं और करोड़ो रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी जिले के सिधवलिया प्रखंड के मटौली महादलित बस्ती आज भी विकास से कोसों दूर है. इस स्वच्छता महाअभियान में भी महादलित या महादलित बस्ती बहुत ही पीछे छुट चुका है.

इस महादलित बस्ती मे लगभग चार सौ घर है और इस बस्ती मे एक भी शौचालय का निर्मान नही हुआ है. यह महादलित बस्ती हर योजना से वंचित है. इस बस्ती मे ना ही कोई डाक्टर आता है और ना ही कोई प्रदाधिकारी. पूरे देश मे स्वच्छ भारत अभियान की हलचल है, परन्तु इस बस्ती मे स्वच्छ भारत अभियान का रंग फीका है. देश अजाद होने के कई दशक बाद भी इस बस्ती के महादलितों ने शौचालय नही देखा है. यह शेर पंचायत का मटौली गांव जिला मुख्यालय से तकरीबन तीस कि.मी. पूरब की तरफ पूर्वोतर रेलवे के शेर हॉल्ट और सिधवलिया स्टेशनो के बीच अवस्थित है. महादलित बस्ती मे ना कोई सड़क है लेकिन हां यहाँ सरकारी सुविधा के नाम पर इस बस्ती मे एक आंगनबाड़ी केन्द्र ज़रूर है. आंगनबाड़ी केन्द्र से बस्ती के साढ़े चार सौ नौनिहालों को आंगनबाड़ी का लाभ भी नही मिल पाता है. यही नतीजा है कि इस बस्ती मे आज तक कोई ग्रामीण इंटरमीडिएट भी पास नही कर पाया. भोजन के आभाव मे कुपोषण के शिकार हैं यहां के मासूम बच्चे. साल मे प्रतेक वर्ष बीस से पचीस बच्चे कुपोशन की वजह से मर जाते है.

आज से एक माह पूर्व गणेश इंडस्ट्री के मालीक रविकांत राय ने यह सब लचार व्यवस्था देख कर मटौली गांव को गोद ले लिये.
प्रतेक माह मे बच्चो का बाल कटवाना साबुन सर्फ देना यहां तक की अब यहां के बच्चो के पढाई लिखाई के लिये कॉपी कलम तथा अन्य समाग्री से मदद भी कर रहे है.

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