गोपालगंज में बाढ़ के डर से बने अपने आशियाने को खुद ही तोड़ने पर मजबूर लोग

गोपालगंज सहित पुरे उत्तर बिहार में आये भीषण तबाही से जहाँ करोडो लोगो का आशियाना उजाड़ गया तो वहीँ उनमे से कुछ जिनके आशियाना अभी भी नदी के बाँध के करीब है ये सभी लोग पता नही  कब उनके यहाँ भी बाँध टूट जाए और इस तबाही में उनका सब कुछ लूट जाए इस डर से ये लोग खुद अपने द्वारा कई सालो के जुटाए धन से बने अपने आशियानों को तोड़ने में जुट गये है . इन्हें डर है की नदी तो सब कुछ बहा ले जाएगी पर कम से कम हमलोग इसे तोड़कर कुछ अपने लिए कहीं दूसरा आशियाना तो बना लेंगे .

इस मार्मिक स्थिति को देख रूह काँप जा रही है की गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के  बिश्म्भारपुर गाँव के 300 घरो से सज्जित यह हरा भरा गाँव धीरे धीरे नदी के आगोश में जाता जा रहा है जिससे इस गाँव में कई घर अब खंडहर बनते जा रहे है लोग खुद ही अपने हाथो से अपने आशियानों को तोड़ विस्थापित कर रहे है . लोगो का कहना है की बाढ़ के नाम चारो तरफ लूट मची है कटाव रोकने के लिए सरकार के द्वारा कभी भी कोई ठोस कदम नही उठाये गये है जिससे आज हमारी स्थिति इतनी भयावह हुई है . स्थानीय लोगो ने बताया की लगभग 100 की संख्या में घर तोड़े जा रहे है . पूरा पूरा गाँव अब कुछ ही दिनों में सन्नाटे की आगोश में चला जाएगा और इन सबके पीछे हमारी निकम्मी सरकार व प्रशासन है .

जिलाधिकारी राहुल कुमार ने इस इलाके का दौरा कर बताया की उनके द्वारा स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया गया है की वो इन टूटे घरो की वीडियोग्राफी कराकर रिपोर्ट दे जिससे इन्हें उचित मुआवजा दिया जा सके साथ ही साथ इन्हें भूमि भी उपलब्ध कराया जाएगा . बाढ़ स्थिति से निबटने के तुरंत बाद नियमानुसार जो भी होगा उसे तुरंत कार्यान्वित किया जाएगा .

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