गोपालगंज में बाढ़ का पानी निकलने से महामारी फैलने से दहशत में लोग

गोपालगंज जिले में आये गंडक नदी से इस भीषण बाढ़ ने कई लोगो को उनके खेत-खलिहान व घर से बेघर कर दिया जबकि कई लाख लोगो को भूख से तड़पने को विवश कर दिया . जैसे-जैसे पानी का जलस्तर नीचे होते जा रहा है वैसे –वैसे बाढ़ के पानी के साथ आये कूड़े कचड़े के सड़ने से बदबू व महामारी फ़ैल रही है जिससे इन पीडितो के बीच दहशत का माहौल बना हुआ है . एक तरफ इस बाढ़ उनसे उनका घर- बार सब छीन लिया तो दुसरी तरफ इस बाढ़ से फ़ैल रही महामारी से जिंदगी जीना दूभर होते जा रहा है .

बाढ़ का पानी तो धीरे धेरे कम हो रहा है पर बाढ़ से कई गांवो के चापाकल बह गये है जिससे शुद्ध पानी मिलना कठिन हो गया है . चिकित्सको के अनुसार मनुष्य में होने वाली अधिकाँश बीमारियाँ पानी के जरिये ही होती है . शुद्ध पानी नही मिलने से इन इलाको में कालरा ,टाइफाइड और डायरिया जैसी बीमारियाँ अपना पैर पसार सकती है . कई स्थानों पर अभी भी पानी का जलजमाव बना हुआ है जिससे संक्रमण फैलने की पुरी आशंका है . कई पीडितो ने शिकायत की है की पानी के जलजमाव में लगातार आवाजाही करने से उनके हाथ व पैर सड़ने लगे है . पीडितो ने बताया की हाथ व पैर में अजीब ढंग से खुजली हो रही है जिसकी बेचैनी से ऐसा लग रहा है की उस अंग को ही अपने शरीर से अलग कर दे . इस बाबत चर्म रोग विशेषज्ञ से बात करने पर पता चला की बाढ़ से चर्म रोगी के संख्या बढ़ना तय है . उन्होंने बताया की बाढ़ के दौरान लोग अपनी जान बचाना चाहते है ऐसे में शुद्धता उनकी प्राथमिकता नही होती . गाँव के सभी कुंए, तालाब व अन्य जलस्त्रोतों का जल प्रदूषित होने से मच्छरों का भी प्रकोप बढ़ना लाज़मी है . लोगो को इससे भी बचना होगा .

बाढ़ पीडितो की मदद को उतरी स्वास्थ्य विभाग कई पंचायतो में ब्लीचिंग पाउडर का छीड़काव करा रही है जिससे की संक्रमण की रोकथाम की जा सके. मरीजो के स्वस्थ्य के लिए चिकित्सा शिविर के साथ पर्याप्त मात्र में दवा भी उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे पीडितो का इलाज संभव हो सके . चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया की अभी पहले दिन सिधवालिया रेलवे स्टेशन के आसपास के क्षेत्रो में छिडकाव कराया गया धीरे बाढ़ग्रस्त सभी क्षेत्रो में इन दवाओ का छिडकाव कर दिया जाएगा . वही जिला प्रशासन भी इस चुनौती से निपटने के लिए अपने कमर कस लिए है लेकिन बाढ़ पीडितो की संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकार को एक विशेष अभियान की तरह इससे निपटना होगा तभी शायद धरातल पर कुछ नजर आएगा .

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