सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार दिया, सरकार बनाए कानून

सुप्रीम कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन तलाक को खत्म कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार 6 महीने के अंदजर इस मुद्दे पर कानून संसद में बनाए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर 6 महीने के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट में 5 में से तीन जज ने तीन तलाक को अंसवैधानिक करार कर दिया है लेकिन 2 जजों ने इसके पक्ष में अपना फैसला सुना दिया है।

कोर्ट ने अपनी सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे। वहीं चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर इसके पक्ष में थे सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीन तलाक को खत्म कर दिया है, कोर्ट ने इसे अंसवैधानिक बताया दिया है। इससे पहले जस्टिस खेहर ने ट्रिपल तलाक पर 6 महीने की रोक लगाने का फैसला सुनाया था। लेकिन बाकि 3 जजों ने इसे पूर्ण रूप से असंवैधानिक घोषित कर दिया है।

देश के सबसे बड़े मुद्दे पर आज सुप्रीम रकोर्ट ने न्याय कर महिलाओं के लिए इंसाफ का फैसला सुनाया है। एक बार फिर आज सुप्रीम कोर्ट ने ये साबित कर दिया है कि किसी का भी हक इस देश में नहीं मारा जाएगा। इस देश में एक बार फिर साबित हुआ कि किसी भी मजहब से ऊपर देश के अंदर संविधान है।

तीन तलाक के पक्ष में नहीं केंद्र

गौरतलब है कि 5 जजों की बेंच इस मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट में यह सुनवाई 6 दिनों तक चली थी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में साफ किया था कि वह तीन तलाक की प्रथा को वैध नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने तीन तलाक को ‘दुखदायी’ प्रथा करार देते हुए न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह इस मामले में ‘मौलिक अधिकारों के अभिभावक के रूप में कदम उठाए।’

1. चीफ जस्टिस जेएस खेहर

2. जस्टिस कुरियन जोसेफ

3. जस्टिस आरएफ नरिमन

4. जस्टिस यूयू ललित

5. जस्टिस अब्दुल नज़ीर

ये थी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दलील

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि तीन तलाक का पिछले 1400 साल से जारी है. अगर राम का अयोध्या में जन्म होना, आस्था का विषय हो सकता है तो तीन तलाक का मुद्दा क्यों नहीं.

खत्म होनी चाहिए तीन तलाक की प्रथा

वहीं मुकुल रोहतगी ने दलील थी कि अगर सऊदी अरब, ईरान, इराक, लीबिया, मिस्र और सूडान जैसे देश तीन तलाक जैसे कानून को खत्म कर चुके हैं, तो हम क्यों नहीं कर सकते. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा था, ‘अगर अदालत तुरंत तलाक के तरीके को निरस्त कर देती है तो हम लोगों को अलग-थलग नहीं छोड़ेंगे. हम मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक के नियमन के लिए एक कानून लाएंगे.’

15 अगस्त को लाल किले से दिए अपने भाषण में पीएम ने कहा कि तीन तलाक के कारण कुछ महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही हैं, तीन तलाक से पीड़ित बहनों ने देश में आंदोलन खड़ा किया, मीडिया ने उनकी मदद की. तीन तलाक के खिलाफ आंदोलन चलाने वाली बहनों का मैं अभिनंदन करता हूं, पूरा देश उनकी मदद करेगा।

महिला अधिकारों की लड़ाई

तीन तलाक पर केंद्र का कहना था कि यह मामला बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक का नहीं है. यह एक धर्म के भीतर महिलाओं के अधिकार की लड़ाई है. इस मामले में विधेयक लाने के लिए केंद्र को जो करना होगा वह करेगा, लेकिन सवाल ये है कि सुप्रीम कोर्ट क्या करेगा? इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि अस्पृश्यता, बाल विवाह या हिंदुत्व के भीतर चल रही अन्य सामाजिक बुराइयों को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकता है. कोर्ट इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से इनकार नहीं कर सकता.

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