गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 30 बच्चों की मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन का संकट जानलेवा साबित हुआ. ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से 24 घंटे के भीतर 30 बच्चों की मौत हो गई. 10 मौतें इंसेफेलाइटिस वार्ड में हुई है जबकि 11 मौतें एनएनयू (न्यू नेटल यूनिट) वार्ड में हुई है. हालांकि, प्रशासन अभी इंसेफेलाटिस से चार मौतों की ही पुष्टि की है. मेडिकल कॉलेज में अफरातफरी का माहौल है. मेडिकल कॉलेज में मृतकों के परिजनों की चीख-पुकार सुनाई दे रही है.

इतनी बड़ी घटना होने पर गोरखपुर सहित पुरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मच गया है. हाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 9 अगस्त को गोरखपुर के बीआरडी अपस्ताल का दौरा किया था. जिसके दो दिन बाद ही इतना बड़ा हादसा हो गया है.

बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी. लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और आज सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों ने दो घंटे तक अम्बू बैग का सहारा लिया.

हॉस्पिटल मैनेजमेंट की बड़ी लापरवाही के चलते 20 बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. बीआरडी मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस का इलाज कराने आये मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल सकी, जिससे एनएनयू वार्ड और इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती 20 बच्चों की मौत हो गई. मेडिकल कालेज के नेहरु अस्पताल में सप्लाई करने वाली फर्म का 69 लाख रुपए का भुगतान बकाया था जिसके चलते गुरुवार शाम को फर्म ने अस्पताल में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप कर दी. गुरुवार से ही मेडिकल कालेज में जम्बो सिलेंडरों से गैस की आपूर्ति की जा रही है. बीआरडी मेडिकल कालेज में दो साल पहले लिक्विड आक्सीजन का प्लांट लगाया गया था. इसके जरिए इंसेफेलाइटिस वार्ड सहित करीब तीन सौ मरीजों को पाइप के जरिए आक्सीजन दी जाती है.

अम्बू बैग के सहारे इंसेफेलाइटिस मरीज

शुक्रवार सुबह सात बजे आक्सीजन पूरी तरह खत्म हो जाने के चलते इंसेफेलाइटिस वार्ड में करीब दो घंटे तक मरीजों को अम्बू बैग के सहारे रहना पड़ा. 12 बजे कुछ सिलेंडर पहुंचे लेकिन इंसेफेलाइटिस इमरजेंसी वार्ड में अभी भी सिलेंडरों की क्राइसिस बनी हुई है. इंसेफेलाइटिस के वार्ड नंबर 100 में हर डेढ़ घंटे में 16 सिलेंडर खर्च हो रहे हैं. चारों तरफ अफरातफरी मची हुई है.

सूचना दो दिन पहले प्रिंसिपल को दे दी थी

आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने करीब 64 लाख रुपए बकाया होने पर आपूर्ति ठप करने की सूचना दो दिन पहले प्रिंसिपल को दे दी थी. गुरुवार को सेंटर पाइप लाइन ऑपरेटर ने प्रिंसिपल, एसआईसी, एचओडी एनेस्थिसिया, इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल अधिकारी को पत्र के जरिए दोबारा लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का स्टॉक बेहद कम होने की जानकारी दी. इन सब जानकारियों और ऑक्सीजन सप्लाई रूकने की बात पहले से पता चल जाने के बावजूद इसके पूर्ति सुचारू रहे इसके लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया. इसका नतीजा ये हुआ कि शुक्रवार सुबह तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कई जानें चली गईं. आपूर्ति करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने करीब 64 लाख रुपए बकाया होने पर आपूर्ति ठप करने की सूचना दो दिन पहले प्रिंसिपल को दी थी.

आपूर्ति फर्म ने स्टॉक बेहद कम होने की दी जानकारी

आपूर्ति फर्म ने गुरुवार को सेंटर पाइपलाइन ऑपरेटर ने प्रिंसिपल, एसआईसी, एचओडी एनेस्थिसिया, इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल अधिकारी को पत्र के जरिए दोबारा लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई का स्टॉक बेहद कम होने की जानकारी दी. गुरुवार को लिक्विड ऑक्सीजन की रीडिंग 900 थी.

ये कहना है प्राचार्य का

मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ.राजीव मिश्रा का कहना है, कि ‘आज दिन में तीन बजे ऑक्सीजन की आपूर्ति सामान्य हो गई है. स्थिति नियंत्रण में है.’

ये कहा डीएम ने

वहीं, इस मामले में डीएम राजीव रौतेला का कहना है कि अब तक जो भी मौतें हुई हैं वो ऑक्सीजन की कमी की वजह से नहीं बल्कि अन्य कारणों से हुई हैं. हालांकि उन्होंने 7 मौतों की पुष्टि की है. साथ ही कहा है कि यह जांच का विषय है. जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

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