Mon. Aug 26th, 2019

गोपालगंज के ऐतिहासिक धनेश्वरनाथ व सिंहासिनी मंदिर के अपार दान से नही हो रहा मंदिर का विकास

गोपालगंज जिले का ऐतिहासिक सिंहासिनीधाम और धनेश्वरनाथ का मंदिर आज भी आस्था का केन्द्र है. सावन की सोमवारी और शुक्रवार को लाखों श्रद्धालु भक्त जलाभिषेक के लिए नाचते गाते भगवान भोलेनाथ के दरबार मे आते हैं. यहां मन्नते पूरी होती हैं.

कहा जाता है कि द्वापर युग मे महाभारत के उपरांत पांडवों द्वार राजसूय यज्ञ किया गया था. यज्ञ के लिए बावन गंडे कुएं और पोखर खोदवाये गये थे. उनका अलग अलग नाम था. राजसूय यज्ञ के उपरांत यहां शिवलिंग की स्थापना की गयी. तब से लोग पूजा अर्चना, जलाभिषेक करने यहां आते हैं.

सरकार इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन स्थल के रूप मे विकसित करने के लिए प्रयासरत है. जिला प्रशासन द्वारा प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है. परन्तु यहां आज बहुत बड़ी तकनीकी व्यवधान खड़ा हो गया है. स्थानीय अंचल पदाधिकारी राणा रंजीत सिंह की माने तों यहां मंदिर के गर्भ गृह और मंदिर को छोड़ कर अतिरिक्त भूमि नही है. फिर भी पुलिस की चाकचौबंद व्यवस्था के बीच यहां एक माह तक भारी मेला श्रावण महीने में लगता है. सावन की सोमवारी और शुक्रवारी को लाखों श्रद्धालु धनेश्वरनाथ के मंदिर में माथा टेकते और जलाभिषेक करते हैं.

परन्तु ऐतिहासिक महत्व के इस मंदिर का आज तक विकास नही हो सका. लाखों रूपये का चढावा कहां रखा जाता है कौन कितना खर्च करता है इसका कोई लेखा जोखा नही है. मंदिर विकास समिति के वर्तमान अध्यक्ष मनोज दास से स्थानीय विधायक मिथिलेश तिवारी द्वारा गोपालगंज के एसडीएम शैलेश कुमार दास और एसडीपीओ मनोज कुमार के समक्ष जब जानकारी मांगी गयी तब अध्यक्ष मनोज दास ने स्वीकार किया कि चढावे की राशि का वे अपने हाथों खर्च करते हैं. उसके रखरखाव के लिए किसी खाता का संचालन नही होता. निसंदेह यह सार्वजनिक संपति की लूट का मामला है और अध्यक्ष मनोज दास पर सवाल उठने लगा है. इससे भी गंभीर आरोप कंचन प्रसाद गुप्ता का है. वे कहते है कि पूर्व की मंदिर विकास समिति के आग्रह पर लाखों रूपये दान देकर मंदिर का जीर्णोधार करवाया और समिति ने एवज मे मंदिर पर नाम अंकित करवा दिया. ऐसे दानदाताओं के नाम को भी मंदिर पर से अध्यक्ष द्वारा हटवाया जा रहा है. इस कारण वहां स्थिति कभी भी विस्फोटक बन सकती है. पुलिस प्रशासन से अध्यक्ष को परहेज है .वे विधि व्यवस्था के लिए लगाये गये पुलिस बल को मंदिर से अलग रखना चाहते हैं परन्तु किसी भी घटना की जिम्मेदारी लेना नही चाहते. इस कारण मंदिर परिसर मे कई बार प्रशासन और स्थानीय लोगो की बैठक हुयी. अध्यक्ष की गतिविधियों से लोगो मे नाराजगी तो है ही प्रशासन भी कुपित है. अब मंदिर मे चढावे के पैसे की जांच कराने की आवाज उठने लगी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected By Awaaz Times !!