इमीग्रेशन ने बढ़ा दी मुश्किल

इमीग्रेशन के नए सिस्टम ने खाड़ी देशों में जाने वाले भारतीय कामगारों की मुश्किल बढ़ा दी है। इसे ई-माइग्रेशन सिस्टम नाम दिया है। इसमें करीब 79 नए पाइंट जोड़कर प्रक्रिया को बढ़ाया है। हालांकि केंद्र सरकार ने कामगारों को अच्छी सैलेरी सुविधा दिलाने के लिए यह शुरुआत की है, लेकिन खाड़ी देशों की कंपनियां इसमें रूचि नहीं ले रही हैं। नतीजा यह है कि श्रमिकों के वीजा एक्सपायर होने लगे हैं। विदेश भेजने वाले एजेंट्स का दावा है कि इससे देश के करीब एक लाख से ज्यादा श्रमिकों के वीजा एक्सपायर हो गए हैं।

इस सिस्टम में सरलीकरण के लिए सऊदी अरब में कुछ दिन पहले भारतीयों के एक दल ने विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह और दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात की। वहीं राज्य सभा सांसद अश्क अली टाक ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। काबिलेगौर है कि खाड़ी देशों में करीब 70 लाख से ज्यादा भारतीय रहते हैं, जिनमें करीब 10 लाख की संख्या में राजस्थानी हैं। ये हर साल 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं। अब खाड़़ी देशों की कंपनियों ने भारत के बजाय पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल सरीखे देशों के श्रमिकों को तवज्जो देना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका सीधा असर राजस्थान अन्य राज्यों की आिर्थक स्थिित पर पड़ सकता है।

जिस देश का वीजा होगा उसका कंपनी का भारतीय दूतावास से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी। उस वीजा का एग्रीमेंट बनेगा, जो ई-माइग्रेशन पर अपलोड होगा। इसमें सैलेरी, खाने अन्य सुविधाओं का संबंधित कंपनी एग्रीमेंट करेगी। ऐसा नहीं करने पर केंद्र सरकार इमीग्रेशन नहीं करेगी। इसके दायरे में कम पढ़े-लिखे लोग हैं।

राज्यसभा सांसद अश्कअली टाक ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने जिक्र किया है कि हाल ही में ई-माइग्रेशन सिस्टम शुरू किया है। यह श्रमिकों के हितों के लिए है, लेकिन इसकी जटिलता अत्याधिक अौपचारिकता से खाड़ी देशों की कंपनियां एंप्लायर्स ने भारतीय श्रमिको को तजरीह देना बंद कर दिया है। इससे देश को विदेशी मुद्रा नहीं आने का नुकसान हो रहा है। ऐसे में ई-माइग्रेशन सिस्टम पर पुनर्विचार हो। पत्र का प्रधानमंत्री ने जवाब दिया है।

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