गोपालगंज में दियारा वासी कटाव झेलने के लिए विवश, आज भी गंडक नदी में हो रहा है कटाव

पिछले कई वर्षों से गंडक नदी के कटाव से गोपालगंज, कुचायकोट, बरौली, मांझा और बैकुण्ठपुर प्रखंडों के एक दर्जन गांव गंडक नदी के गर्भ में समा चुके है। गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ बरसात के मौसम आते ही विभाग ने कटाव निरोधात्मक कार्य कराने में जूट जाती है करोड़ों रूपये पानी में बहा दिया जाता है। फिर इस वर्ष भी वही काम किया जा रहा है जिसको लेकर दियारा के लोगों में मायूसी है।

दियारा कि आधा आबादी इस वर्ष भी कटाव की मार झेलने के लिए विवश है। आज भी गंडक नदी में रूक-रूक कर कटाव हो रही है। जिसको लेकर गंडक दियारा संघर्श समिति के लोगों के जल समाधि सत्याग्रह के बाद सरकार ने बांध और कटाव निरोधी कार्य षुरू किये जाने के बाद दियारा के लोगों ने सरकारी राशि गंडक नदी में बहाने का आरोप लगा रहे है। कटाव रोकने के लिए गंडक नदी के किनारे 6 करोड़ 86 लाख रूपये खर्च अपरन बनाया जा रहा है। गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण बन रहे अपरन गंडक नदी के गर्भ में समा रहे है। हालांकि 15 मई तक कार्य को पुरा करना है।

कार्य करा रहे अभियंता भी मान रहे है कि समय सीमा के अंदर कटाव निरोधी काम पुरा होने की संभावना नहीं दिख रही है, बरसात के मौसम आते ही काम बंद कर देना पडेगा। इसके साथ ही गंडक नदी में रूक रूक कर कटाव होने से काम होने में भी परेशानी हो रही है। यहां पर्याप्त मजदूरों के नहीं मिलने के कारण काम धीमी गति से चल रही है।

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