डॉक्टरों का दावा “लिट्टी खाने से ठीक होती है मधुमेह की बीमारी”

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अल्यूमनी और दिल्ली के मशहूर डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. नरेन्द्र विन्नी गुप्ता ने दावा किया है कि बिहार का मशहूर पारंपरिक व्यंजन लिट्टी खाने से मधुमेह की बीमारी ठीक होती है। पटना में शुक्रवार (24 फरवरी) को आयोजित डॉ. गया प्रसाद मेमोरियल व्याख्यान में भाग लेते हुए गुप्ता ने कहा कि लिट्टी खाने से इन्सुलिन रेसिस्टेन्ट मरीजों में हार्मोन डिजॉर्डर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। गुप्ता ने कहा, “लिट्टी भुने हुए चने के पावडर यानी सत्तू से बना होता है जो इन्सूलिन रेसिस्टेन्ट प्रॉब्लम को ठीक करने में मदद करता है।” उन्होंने कहा, “इन्सुलिन लेवल कंट्रोल रखने के लिए कई बार कई मरीजों को कुछ खास तरह के फल खाने से मना किया जाता है लेकिन सत्तू से बने लिट्टी खाने से शूगर लेवल कंट्रोल रहता है।” उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को इन्सुलिन नियंत्रित करने के लिए सामान्यत: तीन महीने की दवा दी जाती है।

उन्होंने बताया कि जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज की परेशानी होती है उससे काफी पहले उसमें इन्सुलिन रेसिस्टेन्ट डिटेक्ट होता है। यह डायबिटीज का शुरुआती लक्षण होता है। डॉ. गुप्ता ने कहा, “खून में शूगर की ज्यादा मात्रा टिश्यूज और शरीर के अंगों को नष्ट कर देता है। इसलिए उस शूगर लेवल को कम करने के लिए शरीर को ज्यादा मात्रा में इन्सूलिन प्रोड्यूज करने के लिए जोड़ लगाना पड़ता है। ऐसे में इन्सूलिन प्रोड्यूज करने वाले पैनेक्रियाज के सेल्स थक जाते हैं और तब टाइप-2 डायबिटीज की बीमारी होती है। मेटाबॉलिज्म के तहत इन्सुलिन ही ब्लड में मौजूद शूगर को पचाता है।”

इस व्याख्यान में आर्यभट्ट विश्वविद्यालय के कुलपति एसपी सिंह, पटना के मशहूर न्यूरो-फिजिशियन और पीएमसीएच के अलूमनी डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा, पीएमसीएच के प्रिंसिपल एस एन सिन्हा समेत कई लोग मौजूद थे। चेन्नई से आए सीएमसी वेल्लोर के डॉक्टर गणेश गोपाल कृष्णन ने कहा कि बड़ी संख्या में बिहार से मरीज उनके अस्पताल में गुर्दे का इलाज कराने या गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए आते हैं। कृष्णन ने बिहार में गुर्दा प्रत्यारोपण की सुविधा वाले अस्पतालों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन की संख्या में भी इजाफा करना चाहिए। व्याख्यान में दिल्ली के मेदांता इन्स्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थेसियोलॉजी के चेयरमैन यतिन मेहता ने एंटी बायोटिक्स के बढ़ते और बेवजह के इस्तेमाल पर चिंता जताई।

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