राष्ट्रगान अगर फिल्म का हिस्सा हो तो खड़े होने की जरूरत नहीं – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगान मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि राष्ट्रगान अगर किसी फिल्म या फिर किसी डॉक्युमेंट्री का हिस्सा हो तो खड़े होने की जरूरत नहीं है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि फिल्म की शुरुआत के दौरान सिनेमा घरों में जो राष्ट्रगान बजता हैं उसमें खड़े हों। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रगान पर खड़े होने पर बहस की जरूरत है।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह नैतिकता के पहरेदार नहीं है। इधर केंद्र सरकार ने भी कोर्ट को बताया कि राष्ट्रगान पर खड़े होने का फिलहाल कोई कानून नहीं है। आपको बता दें कि राष्ट्रगान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश दिया था।

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सिनेमा हॉल और मल्टीप्लेक्स में अब फिल्मों को दिखाने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा राष्ट्रगान बजाने के दौरान स्क्रीन पर तिरंगा भी दिखाना जरूरी होगा और सम्मान देने के लिए दर्शकों को अपनी जगह पर खड़ा भी होना पड़ेगा। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रगान को फायदे के लिए इस्तेमाल ना करने का भी निर्देश दिया था।

दरअसल पहले कई बार राष्ट्रगान पर सिनेमा हॉल में खड़े होने पर बवाल मच चुका है। इसी मामले में कई बार विरोध भी हो चुका है और सिनेमा हॉल में कई बार झगड़ों के मामले भी सामने आए है। यहां तक की इस मसले पर गुटों में कई बार फिल्म के दौरान मारपीट भी हुई हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने का अब मामला संसद पर छोड़ दिया है।

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